समस्तीपुर। मोहनपुर ओपी अध्यक्ष नंद किशोर यादव हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। 10 दिनों के टारगेट था, लेकिन 5 दिन में एसआईटी ने इसका खुलासा कर दिया। यह पशु तस्कर पिछले छह महीने से विभिन्न क्षेत्रों में चोरी की घटना को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने हत्याकांड में शामिल बदमाशों के गिरोह की पहचान करते हुए पुलिस ने दस बदमाशों को चिंहित करते हुए चार को हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया। साथ ही अन्य चिंहित बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न राज्यों में पुलिस टीम छापेमारी में लगी हुई है। विदित हो कि पशु तस्करों की गिरफ्तारी के लिए की जा रही छापेमारी में उजियारपुर थाना क्षेत्र के शहबाजपुर में 15 अगस्त की अहले सुबह बदमाशों ने ओपी अध्यक्ष नंद किशोर यादव को नजदीक से गोली मार दी। जिसके बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी। एसपी विनय तिवारी ने कहा कि घटना के लिए तीन एसआईटी का गठन किया गया था। जिसके द्वारा गिरोह की पहचान की गयी। जिसमें 30 से 35 लोग शामिल हैं। यह गिरोह नालंदा जिला के करायपरशुराय थाना के झरहापर गांव, भवानी विगहा और शानविगहा के अलावे झरहापर गांव के आसपास के तीन चार गांव है। जहां पर एक संगठित गिरोह के द्वारा पशु तस्करी किया जाता है।

जांच के दौरान एसआईटी ने गिरोह के दस कुख्यात बदमाशों को चिंहित किया। जिसके द्वारा चार बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। एसपी ने बताया कि गिरफ्तार बदमाशों में नालंदा जिला के हिल्सा थाना के गराय बिगहा के रहिस कुमार, चिकसौरा थाना के भवानी विगहा के धनंजय कुमार, कराय परशुराय थाना के सांढ विगहा के विकास कुमार एवं खुशरुपुर थाना के लोदीपुर के रवि कुमार शामिल है। इसके पास से घटना में प्रयुक्त एक ट्रक, ड्राइविंग लाईसेंस, क्रेता विक्रेता संबंधित दस्तावेज, कांड में प्रयुक्त छह मोबाइल, एक देशी कट्टा, पिकअप वैन बरामद किया गया है।

एसपी ने बताया कि तीन एसआईटी का गठन किया गया था। जिसको कांड खुलासा करने के लिए दस दिनों का टारर्गेट दिया गया था। लेकिन एसआईटी ने पांच दिनों के अंदर दस कुख्याल की पहचान करते हुए चार को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही गिरोह में शामिल फरार बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम विभिन्न राज्यों में काम कर रही है। शीघ्र ही अन्य बदमाशों को भी गिरफ्तार किया जाएगा।

एसपी ने बताया कि गिरोह में शामिल 30 से 35 लोग अलग-अलग क्षेत्रों में बंट कर घटना को अंजाम देते थे। गिरोह के द्वारा एक ट्रक, दो पिकअप, दो स्कार्पियो एवं कुछ बोलेरो का प्रयोग किया जाता था। कुछ लोग घटना वाले क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति को समझते थे। ताकि कहां से अधिक से अधिक मवेशी की चोरी कर आसानी से निकला जा सके। गिरोह में शामिल सभी लोगों को अगल-अलग कामों का भी बंटवारा किया गया था।

एसपी ने बताया कि गिरफ्तार बदमाशों से हुई पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि यह गैंग छह महीनों से चोरी कर रहा था। इसके द्वारा जहानाबाद, गया, मोतिहारी, सीतामढ़ी में भैंस की चोरी कर चुका था। यह गिरोह आठ बजे पहुंच जाता था। ट्रक को कहीं रेत या मिट्टी के टिल्ली के आसपास पार्किंग करता था। फिर रेकी करने वाला स्कार्पियों से पहले पहुंच जाता। फिर पिकअप से भैंस की चोरी कर मिट्टी के टिल्ले के सहारे चोरी की गयी भैंस को ट्रक पर लोड करता था।

एसपी ने बताया कि गैंग में शालिम चार बदमाशों के हाथ में हथियार रहता है। ताकि अगर कोई पब्लिक जाग गयी या कोई पकड़ने का प्रयास किया तो पहले हवाई फायरिंग कर धमकाता था। फिर हवाई फायरिंग करते हुए गिरोह केलोगों को सुरक्षित स्कॉट कर क्षेत्र से बाहर निकाल लाता था। एसपी ने बताया कि गठित तीन एसआईटी का नेतृत्व सदर डीएसपी संजय कुमार पांडेय, दलसिंसहराय डीएसपी दिनेश कुमार पांडेय व पटोरी डीएसपी रवि शंकर प्रसाद कर रहे थे।


इस टीम में मुफस्सिल थानाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार सिंह, नगर थानाध्यक्ष विक्रम आचार्या, पटोरी थानाध्यक्ष प्रवीण मिश्रा, मोहनपुर ओपी अध्यक्ष कृष्णचंद्र भारती, एसआई विशद विश्वास, रंजीत कुमार शर्मा, मोहिउद्दीननगर थानाध्यक्ष गौरव कुमार, वारिसनगर थानाध्यक्ष संतोष कुमार यादव, हलई ओपी अध्यक्ष पवन कुमार व मुसरीघरारी थानाध्यक्ष पंकज कुमार को शामिल किया गया था।





