समस्तीपुर। समस्तीपुर मंडल के कपरपुरा – वाल्मीकिनगर रेलखंड के वाल्मीकिनगर स्टेशन से गोरखपुर कैंट रेलखंड (96 किलोमीटर) के दोहरीकरण की स्वीकृति मिल गई है है जिसकी अनुमानित लागत 1269 करोड़ है। इस रेलखंड पर 6.676 किलोमीटर पश्चिम चंपारण (बिहार) क्षेत्र में आएगा तथा 89.264 किलोमीटर उत्तर प्रदेश में आएगा। मंडल कार्यालय में एडीआरएम टू आलोक कुमार झा ने प्रेस वार्ता में कहा कि इस रेल खंड मे गंडक नदी पर एक बड़ा पुल भी है जिसकी लंबाई 854 मीटर है। इस कार्य के पूर्ण होने के उपरांत पूर्वोत्तर राज्यों को उत्तर भारत के राज्यों से कनेक्टिविटी आसान हो जाएगा साथ ही नेपाल के लोगो को भी फायदा होगा।



यहाँ उल्लेखनीय है कि मुजफ्फरपुर-वाल्मीकिनगर (210.3 किलोमीटर) पर दोहरीकरण का कार्य प्रगति पर है जिसमे 86.15 किलोमीटर कार्य पूर्ण हो चूका है तथा 121.85 किलोमीटर पर दोहरीकरण का कार्य प्रगति पर है। मुजफ्फरपुर से गोरखपुर कैंट तक सम्पूर्ण रेलखंड के दोहरीकृत हो जाने पर इस रेलखंड पर गाड़ियों के परिचालन समय में कमी आयगी तथा यात्रियों के कीमती समय की बचत होगी। मौके पर सीनियर डीसीएम चंद्रशेखर प्रसाद, सीनियर डिपोओ राजीव रंजन, सीनियर डीएफएम राहुल राज, डिप्टी चीफ इंजीनियर कंस्ट्रक्शन बीके गुप्ता सहित अन्य थे।




वाल्मीकिनगर – गोरखपुर कैंट रेलखंड पर दोहरीकरण के उपरांत निम्न फायदा होगा। पूर्वोत्तर कनेक्टिविटी को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए खाद्यान्न, उर्वरक, सीमेंट, कोयला, लौह और पत्थर के चिप्स। नौतनवा, रक्सौल/बीरगंज और जोगबनी की नेपाल कनेक्टिविटी। उत्तर बिहार के जूट और चीनी उद्योग तथा मक्का और उसके उत्पादों को लाभ होगा। यात्री को असम, त्रिपुरा, उत्तरी बिहार और पूर्वी यूपी के लिए ट्रेनों और नेपाल से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए चलने के समय में 2 से 3 घंटे की बचत। नरकटियागंज और गोरखपुर के बीच सबसे उपेक्षित खंड पर अधिक यात्री ट्रेनें होंगी





