समस्तीपुर में महामारी की तरह फैल रहा आई फ्लू बीमारी, सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल तक बढ़ रहा है भीड़

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समस्तीपुर। मौसमी बीमारी के तहत जिले में आई फ्लू यानी कंजंक्टिवाटिस नामक बीमारी तेजी से फैल रहा है। यूं कहें यह महामारी का रूप पकड़ता जा रहा है। जिसके कारण सदर अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों तक मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है। सदर अस्पताल में अचानक आई फ्लू पीड़ित मरीजों की भीड़ को देखते हुए सभी आवश्यक दवा भी उपलब्ध करा दी गयी है।

केवल सदर अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 90 से सौ मरीज ओपीडी में आई फ्लू से पीड़ित पहुंच रहे हैं। वहीं निजी अस्पतालों में भी मरीजों की संख्या बढ़ गयी है। जिला मुख्यालय में औसतन तीन से चार सौ मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। सदर अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन कुमार ने कहा कि यह संक्रामक बीमारी है।

यह पीड़ित व्यक्ति के संपर्क में रहने से ही फैलता है। साथ ही आंखों को गंदे कपड़े, गंदे हाथ या दूसरे के उपयोग किए गए रुमाल, तौलिया का भी प्रयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल के ओपीडी में लगभग सौ मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें आई फ्लू का संक्रमण है।

कंजंक्टिवाइटिस के लक्षण के बारे में सदर अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पवन कुमार ने कहा कि आंखों में लालपन की शिकायत, सूजन, खुजली, जलन, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता, सफेद चिपचिपा पदार्थ निकलना एवं सामान्य से अधिक आंसू आना इसका मुख्य लक्षण है।

कंजंक्टिवाइटिस से बचाव को लेकर हाथों को स्वच्छ रहें और अपने हाथ को बार-बार धोएं। दूषित हाथों के कारण ही यह बीमारी फैलता है। आंखों के मेकअप और तौलिये जैसी निजी वस्तुओं को एक दूसरे से साझा करने से बचना चाहिए। आंखों के लिए इस्तेमाल होने वाले ब्यूटी प्रोडक्ट को एक्सपायर होने के बाद इस्तेमाल ना करें।

तकिये के कवर का बार-बार धोएं और साफ कपड़ा ही पहने। डॉक्टर के अनुसार कंजंक्टिवाइटिस संक्रामक है, इस लिए जिन लोगों को आई फ्लू है, उनके साथ करीब रहने से बचना चाहिए। कभी आंखों को गंदे हाथ या फिर गंदे कपड़े से ना छुए। अगर कुछ दिन में यह ठीक नही होता है तो दूसरा रूप भी ले सकता है।

सदर अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ पवन कुमार ने कहा कि यह संक्रामक है। इस लिए लोगों को सतर्क रहने की जरुरत है। आठ से दस दिनों में ठीक हो रहा है। यह संपर्क से ही फैलता है। उन्होंने कहा कि मोक्सीफ्लोक्सासीन, सिप्रोफोलोक्सासीन, सिटरीज दवा सदर अस्पताल में उपलब्ध है। छह से आठ बार एक-एक बूंद मरीजों को आंख में डालना होता है। दवा लेने से पहले नेत्र विशेषज्ञ से जरुर परामर्श लें।

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