समस्तीपुर में एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल जारी, नारों से गूँजता रहा सदर अस्पताल

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समस्तीपुर। समस्तीपुर जिले सरकारी अस्पतालों में संचालित 102 एंबुलेंस कर्मियों का हड़ताल नौवे दिन भी जारी रहा। एंबुलेंस कर्मियों ने शुक्रवार को भी अपनी मांगों के समर्थन में हड़ताल जारी रखते हुए सदर अस्पताल परिसर में धरना पर बैठे रहे। इस दौरान एंबुलेंस कर्मी अपनी मांगों के समर्थन में स्वास्थ्य विभाग एवं बिहार सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। एंबुलेंस कर्मियों के नारों से दिनभर सदर अस्पताल गूंजता रहा।


कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से जिले भर के सरकारी अस्पतालों में एंबुलेंस सेवा पूरी तरह ठप हो गयी। जिसके कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत एंबुलेंस कर्मियों ने 13 जुलाई से हड़ताल पर हैं।

पूर्व के एजेंसी के द्वारा भी कर्मियों के वेतन की राशि का गबन कर लिया गया। नयी एजेंसी के आने के बाद बकाया तीन महीने का वेतन नहीं दिया गया है। मुख्य मांगो में बकाया वेतन की राशि का भुगतान करने, 11 माह के पीएफ की राशि का भुगतान अविलंब करने, नए कर्मियों को नियुक्ति पत्र उपलब्ध कराने,

आठ घंटे की ड्यूटी लेने सहित अन्य मांग शामिल है। मौके पर भोला कुमार, रमन कुमार झा, धर्मेंद्र कुमार, अभिनंदन कुमार, सतीश कुमार सिंह, शंकर पासवान, विष्णुदेव साह, राहुल कुमार, ओम प्रकाश गिरी, संतोष कुमार, लालजी कुमार, मुकेश कुमार सिंह, दिनेश कुमार चौधरी, राज कुमार पंडित आदि थे।


विदित हो कि हड़ताल से पहले एंबुलेंस कर्मियों ने ज्ञापन के माध्यम से जिला प्रशासन, सिविल सर्जन, पीडीपीएल कंपनी को सूचना दी गयी थी। मांग पर सुनवाई नहीं होने पर हड़ताल किया गया है।

समस्तीपुर स्वास्थ्य विभाग में एंबुलेंस कर्मियों के हड़ताल के कारण 102 एंबुलेंस सेवा पूरी तरह से ठप हो गयी है। जिसके कारण निजी एंबुलेंस कर्मियों की चांदी कट रही है। सदर अस्पताल आने-जाने एवं रेफर मरीजों को अन्यत्र जिला के अस्पतालों में जाने के लिए निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ रहा है।

जिसमें निजी एंबुलेंस के चालक मनमानी राशि मरीजों के परिजन से वसूल रहे हैं। मरीजों के परिजनों की मानें तो सदर अस्पताल से शहर के किसी भी निजी अस्पताल में ले जाने के लिए एंबुलेंस कर्मी न्यूनतम एक हजार रुपये की मांग करते हैं। वही पटना से दरभंगा जाने के लिए दोगुनी राशि की मांग किया जाता है। जिसके कारण मरीजों को आर्थिक एवं मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

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