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समस्तीपुर। समस्तीपुर जिले के वकीलों ने समलैंगिक और ट्रांसजेंडर आदि के विवाह को कानूनी मान्यता देने संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर विरोध जताया है। शुक्रवार को इस संबंध में जिले के वकीलों ने राष्ट्रपति को आवेदन भेज उक्त कानून को मान्यता नहीं देने का आग्रह किया है। इस संबंध में वकीलों ने बैठक करने के बाद राष्ट्रपति के नाम लिखित आवेदन एडीएम को सौंपा है।

राष्ट्रपति को भेजे गए आवेदन में वकीलों ने कहा है कि वर्तमान में देश सामाजिक व अिार्थक क्षेत्र में कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है। देश के नागरिकों की बुनियादी समस्याओं जैसे, गरीबी उन्मूलन, नि:शुल्क शिक्षा का क्रियान्वयन, प्र्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार, जनसंख्या नियंत्रण की समस्या देश को प्रभावित कर रही है।

लेकिन इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय ने अब तक कोई न्यायिक सक्रियता नहीं दिखायी है। आवेदन में कहा है कि भातर विभिन्न धर्मो, जातियों व उप जातियों वाला देश है। शताब्दियों से केवल जैविक पुरूष व जैविक महिला के मघ्य विवाह को मान्यता है।

विवाह की संस्था न केवल दो विषम लैंगिगों का मिलन है, बल्कि मानव जाति की उन्नति का भी साधन है। विवाह शब्द को विभिन्न नियमों, अधिनियमों, लेखों व लिपियों में परिभाषित किया गया है। सभी धर्मों में केवल विपरीत लिंग के दो व्यक्तियों के विवाह का ही उल्लेख है।

विवाह को दो लैंगिकों के पवित्र मिलन के रूप में मान्यता देते हुए भारत में समाज विकसित हुआ है। पाश्चात्य देशों में लोकप्रिय दो पक्षों के मध्य अनुबंध या सहमति को मान्यता नहीं दी है।

राष्ट्रपति को भेजे गये आवेदन पर हस्ताक्षर करने वाले वकीलों में विमल किशोर राय, मोती बाबू, सुरेंद्र झा, रंजीत कुमार सिंह, सुधाकर राय, रामभजन महतो, जामुन दास,

अजय कुमार यादव, धीरेंद्र कुमार भगत , उमानन्द हरहर, चन्देश्वर महतो, गोविंद कुमार, अवनीश कुमार, संजय कुमार चौधरी, भारतेंदु पाठक आदि शामिल है।






