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वाराणसी। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के बेटे और वर्तमान में नीतीश सरकार में पर्यावरण मंत्री व समस्तीपुर जिले के हसनपुर के विधायक तेज प्रताप यादव का सामान परेड कोठी स्थित होटल से बाहर निकालकर रिसेप्शन पर रखवा दिया गया। शुक्रवार रात होटलकर्मियों के व्यवहार से क्षुब्ध मंत्री तेज प्रताप के निजी सहायक मिशाल सिन्हा ने सिगरा थाने में तहरीर दी। उधर, होटल प्रबंधन के अनुसार मंत्री और उनके सहयोगी दो कमरों में रुके थे। दोनों कमरों की बुकिंग नहीं थी। सहायक मिशाल सिन्हा के मुताबिक अरकेडिया होटल के कमरा नंबर 205 और 206 में सामान रखे गए थे। कमरा नंबर 206 मंत्री तेजप्रताप यादव जबकि 205 में निजी सहायक एवं सुरक्षाकर्मी थे। शुक्रवार रात घाट भ्रमण व गंगा में नौकायन, गंगा आरती देखने के बाद मंत्री एवं अन्य सभी जब होटल लौटे तो उन्हें सामान रिसेप्शन पर रखे मिले। सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि होटल के जीएम संदीप कुमार सामान निकलवा रहे हैं। मंत्री तेज प्रताप यादव ने इस पर गहरी नाराजगी जताई। मिशाल सिन्हा की तहरीर पर रात में ही पुलिस पहुंची।
उधर, इस घटनाक्रम के बाद मंत्री, उनके निजी सहायक एवं सुरक्षाकर्मी रवाना हो गए। इस संबंध में डीसीपी काशी आरएस गौतम ने बताया कि सिगरा पुलिस पूरे प्रकरण की छानबीन कर रही है।
इंस्पेक्टर सिगरा राजू सिंह ने बताया कि मंत्री तेजप्रताप यादव के यहां आने का कोई प्रोटोकॉल नहीं मिला था। होटल में उनके आने, रवानगी और सामान निकालने से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, होटल के कागजात आदि की रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी। यह होटल आजमगढ़ निवासी का है। वह तीन-चार माह पहले ही शुरू हुआ है।
पटना। पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने आरोप लगाया है कि वन एवं पर्यावरण मंत्री तेजप्रताप यादव ने वाराणसी के होटल में जो व्यवहार किया, उससे बिहार की छवि खराब हुई। उन्होंने आरोप लगाया है कि होटल प्रबंधन के अनुसार तेज प्रताप यादव ने तय समय पर कमरा खाली नहीं किया और वाजिब बिल का भुगतान भी नहीं किया। मोदी ने आगे कहा कि पड़ोसी राज्य के धार्मिक नगर में राज्य के एक मंत्री का होटल प्रबंधन के साथ गलत व्यवहार बिहार को शर्मसार करने वाली घटना है। कहा कि तेज प्रताप ने इस वर्ष होली पर वृंदावन की रासलीला मंडली पर पारिश्रमिक विवाद में केस दर्ज करा दिया था।
इधर, होटल मैनेजर के अनुसार मंत्री व उनके लोग सात अप्रैल की सुबह 10 बजे मंदिर में दर्शन की बात कहकर चले गए। 12 बजे कई बार संपर्क करने के बाद भी देर शाम तक तेजप्रताप या उनके स्टाफ का पता नहीं चला। बार-बार आईडी मांगने पर भी नहीं दे रहे थे। जिस ग्रुप ने बुकिंग कराई थी, उसे भी कमरा देना था। इस कारण सात अप्रैल की रात करीब एक बजे 205 नंबर कमरे का दरवाजा खटखटाया गया। मंत्री के निजी सुरक्षाकर्मी की मौजूदगी में उसी कमरे से सामान निकलवा कर रिसेप्शन पर रखा गया। मंत्री का कमरा नहीं खोला गया।
मिली जानकारी के अनुसार बिहार के मंत्री तेजप्रताप यादव रोडवेज बस स्टैंड के निकट परेड कोठी स्थित आरकेडिया होटल में गत छह अप्रैल की रात एक बजे के बाद पहुंचे थे। उन्हें और उनके स्टाफ को एक स्थानीय परिचित के जरिए होटल में दो कमरे (205 और 206) मिल पाए थे। वह परिचित जल निगम का कर्मचारी बताया जा रहा है।
होटल के मैनेजर संदीप कुमार ने शनिवार को सिगरा पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उसके मुताबिक तेजप्रताप को कमरे इस शर्त पर दिए गए थे कि वे सात अप्रैल को 12 बजे तक खाली कर देंगे। क्योंकि बाहर के किसी ग्रुप ने होटल के सभी कमरे पहले से ही बुक करा रखे थे। छह अप्रैल की रात शहर के दूसरे होटलों में भी कमरे नहीं थे। इसलिए जल निगम के कर्मचारी ने मैनेजर से कमरे दिलाने की गुजारिश की थी।
तेज प्रताप यादव व उनके लोग छह अप्रैल की रात 1.35 बजे पहुंचे। कमरा नंबर 206 में मंत्री जबकि 205 में उनके निजी सहायक और सुरक्षाकर्मी थे। उधर जिस ग्रुप ने कमरा बुक कराया था, वह सात अप्रैल को सुबह आठ बजे ही आ गया। उन्हें दूसरे कमरे में एडजस्ट किया गया।
बिना भुगतान चले गए होटल मैनेजर के अनुसार जिस कमरे में मंत्री तेजप्रताप थे, उसे आठ अप्रैल को भी नहीं खोला गया। उनका सामान अब भी कमरे में है। वहीं, मंत्री और उनके लोग बिना भुगतान किए चले गए। सा. एचएच











