मधुमक्खी पालकों को नहीं मिल रहा मधु का उचित कीमत, 65 रूपये किलो बेचने को मजबूर

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समस्तीपुर। मधुमक्खी पालकों को नहीं मिल रहा है मधु का उचित मूल्य। अपने उत्पाद को सिर्फ 65 रूपये लीटर मधु बेचने को किसान मजबूर हैं। ये हाल है ताजपुर के सरसौना के वार्ड-10 बच के मधुमक्खी उत्पादक किसानों का। समस्तीपुर जिले के अन्य जगहों का भी यही हाल बताया जा रहा है।
किसान उपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि वे सरायरंजन के गंगापुर में भी मधुमक्खी पालते हैं. उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि जगह, बक्सा, ड्राम, मशीन, कंटर, मच्छरदानी समेत अन्य महंगे उपकरण खरीदना पड़ता है। करीब 100 बक्से पर 3-4 आदमी को नियमित कार्य करना पड़ता है. बाबजूद इसके बाजार के आभाव में इसे निजी पैकार के हाथों 65 रूपये किलो बेचना पड़ा है. यह बिल्कुल घाटे का सौदा है।


जीविका से जुड़ी सविता सिंह बताती है कि जीविका द्वारा मधुमक्खी पालन में लोन, उपकरण देने में कुछ सहायता की गई है लेकिन उत्पाद खरीदने का बेहतर व्यवस्था नहीं होने का दंश उत्पादकों को झेलना पड़ता है।
किरण कुमारी, कंचन कुमारी, रेणू कुमारी, नीता देवी आदि बताती है कि सरसों के सीजन में मात्र 65 रूपये लीटर मधु बेचना पड़ा। इससे मधुमक्खी उत्पादक किसानों का कमर टूट गया. अब लीची, आम, सहजन, जामून आदि का मधु भी 100 के अंदर ही बिकने की संभावना है। अगर सरकार ध्यान नहीं देगी तो काम बंद करना ही पड़ेगा।


भाकपा माले प्रखण्ड सचिव सुरेन्द्र प्रसाद सिंह ने उपस्थित किसानों को मधुमक्खी पालकों की समस्या को उचित फोरम पर उठाने का आश्वासन दिया है। अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सचिव ललन कुमार ने कहा है कि किसानों की समस्या को स्मार-पत्र, अधिकारियों से मिलकर उठाने समेत किसानों को एकजुट कर आंदोलन चलाने की भी घोषणा की है।

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