बिहार में अब बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करेंगी जीविका दीदियां, एप से बुक कर सकेंगे केयरटेकर

व्हाट्सएप से जुड़ने को क्लीक करें

Doorbeen News Desk: पटना। बिहार में जीविका दीदियां अब खाना बनाने और साफ-सफाई के साथ बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों की देखभाल की जिम्मेदारी भी संभालेंगी। कामकाजी महिलाओं की सुविधा और जीविका दीदियों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जीविका प्रशासन ने नई पहल की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत इच्छुक जीविका दीदियों को केयरटेकर के रूप में प्रशिक्षित कर जरूरतमंद परिवारों को उनकी सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में पटना के गर्दनीबाग स्थित ऑफिसर्स क्वार्टर से होगी। इसके लिए पटना जिला जीविका प्रशासन कार्ययोजना तैयार कर रहा है। प्रयोग सफल होने पर इस व्यवस्था का विस्तार पूरे बिहार में किया जाएगा।

पहले चरण में 300 से अधिक ऑफिसर्स फ्लैट को मिलेगी सुविधा

गर्दनीबाग में 300 से अधिक ऑफिसर्स फ्लैट हैं। पहले चरण में यहां रहने वाले परिवारों को इस नई सेवा की जानकारी दी जाएगी। इसके लिए इच्छुक जीविका दीदियों का समूह तैयार किया जाएगा। जिन परिवारों को घरेलू कामकाज, बच्चों या बुजुर्गों की देखभाल के लिए मदद की आवश्यकता होगी, उन्हें मांग के अनुसार प्रशिक्षित दीदियों की सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

मोबाइल एप से कर सकेंगे केयरटेकर की बुकिंग

जीविका प्रशासन इस सेवा को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की तैयारी भी कर रहा है। इसके लिए एक विशेष मोबाइल एप विकसित करने की योजना है। इसके माध्यम से जरूरतमंद परिवार घर बैठे केयरटेकर की बुकिंग कर सकेंगे। भविष्य में इसी एप के जरिए राज्यभर में जीविका दीदियों की सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल के लिए मिलेगा प्रशिक्षण

केयरटेकर बनने की इच्छुक जीविका दीदियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें बच्चों की देखभाल, बुजुर्गों की दैनिक जरूरतों और दिव्यांग व्यक्तियों की सहायता से जुड़ी बुनियादी जानकारी दी जाएगी।

इस पहल से कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। वे अपने बच्चों और बुजुर्ग परिजनों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित सहायिका की सेवा ले सकेंगी। साथ ही बच्चों को क्रेच या पालनाघर में रखने की जरूरत भी कम होगी।

सुरक्षा के लिए परिवारों से भरवाया जाएगा शपथ पत्र

नई व्यवस्था में जीविका दीदियों और सेवा लेने वाले परिवारों की सुरक्षा तथा जवाबदेही का भी ध्यान रखा जाएगा। दीदियों को काम पर रखने वाले परिवारों से निर्धारित शर्तों के पालन के लिए शपथ पत्र भरवाया जाएगा।

परिवारों को कार्यस्थल पर जीविका दीदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी। किसी तरह के दुर्व्यवहार या परेशानी की शिकायत मिलने पर संबंधित परिवार को काली सूची में डाला जा सकता है। वहीं, यदि कोई जीविका दीदी चोरी या बच्चों के साथ अनुचित व्यवहार जैसी गतिविधियों में संलिप्त पाई जाती है, तो उसे इस कार्य से हटा दिया जाएगा।

अस्पतालों में पहले से सेवा दे रही हैं आठ हजार से अधिक दीदियां

जीविका दीदियां पहले से ही राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। दीदी की रसोई के संचालन के साथ अस्पतालों की साफ-सफाई में भी उनकी भागीदारी है। वर्तमान में आठ हजार से अधिक जीविका दीदियां सरकारी अस्पतालों में सफाई कार्य से जुड़ी हुई हैं।

अब केयरटेकर सेवा शुरू होने से उनके लिए रोजगार का एक और विकल्प उपलब्ध होगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने के साथ उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।

नई पहल से होंगे ये सात बड़े फायदे

  • कामकाजी महिलाओं को बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल में मदद मिलेगी।
  • बच्चों की घर पर ही देखभाल हो सकेगी, क्रेच पर निर्भरता घटेगी।
  • बुजुर्गों और दिव्यांगों की दैनिक जरूरतें पूरी करने में सहायता मिलेगी।
  • अकेले रहने वाले बुजुर्गों को देखभाल और सहयोग मिल सकेगा।
  • निजी केयरटेकर एजेंसियों पर परिवारों की निर्भरता कम होगी।
  • उचित दर पर प्रशिक्षित जीविका दीदियों की सेवाएं मिल सकेंगी।
  • जीविका दीदियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार और अतिरिक्त आय का अवसर मिलेगा।

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