निपुण पथ के तहत पढ़ना, लिखना और गणना पर अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी

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Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत सभी 125 प्रारंभिक विद्यालयों में शनिवार को एचएम के नेतृत्व में अभिभावक शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस बार संगोष्ठी की थीम ‘निपुण पथ, पढ़ना, लिखना और गणना रखी गई। शिक्षा विभाग के वार्षिक कैलेंडर के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए बच्चों की समग्र शिक्षा, नियमित उपस्थिति और सर्वांगीण विकास के प्रति साझा जिम्मेदारी को मजबूत करना रहा।

शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार आयोजित संगोष्ठी में बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराने, खेल खेल में पढ़ाई और पढ़ाई के साथ खेल को बढ़ावा देने के साथ उनकी व्यक्तिगत क्षमता एवं रुचि को पहचानने पर विशेष जोर दिया गया। शिक्षकों ने अभिभावकों को बताया कि प्रत्येक बच्चा सीखने की अपनी गति, रुचि और क्षमता के अनुसार अलग होता है। ऐसे में बच्चों की क्षमताओं को समझते हुए उन्हें सीखने के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है।

विद्यालय में अध्ययनरत सभी बच्चे निपुण पथ के तहत पढ़ना, लिखना और गणना जैसे बुनियादी कौशल हासिल करें, इसी उद्देश्य से इस बार की अभिभावक शिक्षक संगोष्ठी को थीम से जोड़ा गया। संगोष्ठी के दौरान अर्द्धवार्षिक मूल्यांकन की उत्तरपुस्तिकाएं अभिभावकों के समक्ष साझा की गईं। शिक्षकों ने बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों के बारे में अभिभावकों से चर्चा की और उनकी प्रगति की स्थिति से अवगत कराया।

बच्चों ने किन विषयों में बेहतर प्रदर्शन किया है और किन विषयों में उन्हें अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है, इस पर भी अभिभावकों से विचार विमर्श किया गया। कमजोर प्रदर्शन करने वाले बच्चों के लिए विद्यालय स्तर पर विशेष ध्यान देने और आवश्यकतानुसार कार्ययोजना तैयार करने पर भी चर्चा हुई। शिक्षकों ने अभिभावकों से बच्चों की नियमित विद्यालय उपस्थिति सुनिश्चित कराने की अपील की।

उन्हें समय पर विद्यालय भेजने, घर पर पढ़ाई के लिए सकारात्मक एवं शांत वातावरण उपलब्ध कराने तथा विद्यालय आने से पहले बच्चों को पौष्टिक नाश्ता कराने की सलाह दी गई। शिक्षकों ने कहा कि स्वस्थ और पोषित बच्चा विद्यालय में अधिक सक्रिय रहता है। पर्याप्त पोषण मिलने से बच्चों में सीखने, समझने और गतिविधियों में भाग लेने की क्षमता भी बेहतर होती है। इसलिए बच्चों की शिक्षा के साथ उनके स्वास्थ्य एवं पोषण पर भी परिवार को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

संगोष्ठी में बच्चों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, पोषण, अनुशासन, व्यवहार और सीखने की क्षमता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षकों ने अभिभावकों को बताया कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल पाठ्यपुस्तक आधारित पढ़ाई पर्याप्त नहीं है। बच्चों में स्वच्छता की आदत, अनुशासन, सहयोग की भावना, अच्छा व्यवहार और अपनी बात रखने की क्षमता विकसित करना भी जरूरी है।

विद्यालय में इन सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए बच्चों के विकास के लिए गतिविधियां कराई जा रही हैं। कार्यक्रम के दौरान प्रत्येक बच्चे की शैक्षणिक प्रगति की समीक्षा भी की गई। जिन बच्चों की पढ़ाई कमजोर है अथवा जिनकी विद्यालय में उपस्थिति कम रहती है, उनके संबंध में अभिभावकों से जानकारी ली गई। ऐसे बच्चों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर विचार किया गया, ताकि उन्हें सीखने में अपेक्षित सहयोग मिल सके।

शिक्षकों ने कहा कि किसी भी बच्चे को उसकी वर्तमान उपलब्धि के आधार पर पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए। नियमित अभ्यास, शिक्षक का मार्गदर्शन और अभिभावकों का सहयोग मिलने पर बच्चों की सीखने की क्षमता में सुधार लाया जा सकता है।
अभिभावकों को यह भी बताया गया कि बच्चों की शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है। बच्चे विद्यालय में जितना समय बिताते हैं, उसके अतिरिक्त घर का वातावरण भी उनके सीखने और व्यवहार को प्रभावित करता है।

यदि विद्यालय और परिवार मिलकर बच्चों का मार्गदर्शन करें तो उनकी सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। इसी उद्देश्य से अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई में नियमित रूप से रुचि लेने, उनकी कॉपियां देखने और शिक्षकों के संपर्क में रहने की सलाह दी गई। संगोष्ठी में बच्चों की रुचि, प्रतिभा और व्यवहार से जुड़े पहलुओं पर भी अभिभावकों से विचार-विमर्श किया गया। शिक्षकों ने कहा कि प्रत्येक बच्चे की जरूरत और क्षमता अलग होती है। इसलिए बच्चों पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय उनकी रुचि को समझकर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

खेल, रचनात्मक गतिविधियों और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाकर बच्चों के विकास को बेहतर दिशा दी जा सकती है।
अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी के माध्यम से विद्यालयों में बच्चों के सीखने के स्तर को बेहतर बनाने के साथ शिक्षा व्यवस्था में अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। शिक्षकों ने अभिभावकों से कहा कि वे बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों को भी प्रोत्साहित करें। घर में बच्चों से बातचीत करें, उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करें और पढ़ाई को बोझ के बजाय रुचिकर गतिविधि बनाने का प्रयास करें। इससे बच्चों में सीखने के प्रति सकारात्मक भावना विकसित होगी।

संगोष्ठी में एचएम बालमुकुंद सिंह, मोहम्मद अब्दुल्लाह, बिहारी दास, देवानंद कामत, अरुण पासवान, दिलीप ठाकुर, रामनाथ पंडित, मृत्युंजय राय, नीलू कुमारी, संतोष कुमार, संजीत कुमार, जहांआर प्रवीण, सरिता कुमारी, मोहम्मद जैनुद्दीन, मदन कुमार, उमेश प्रसाद राय, शांति भूषण, मृत्युंजय कुमार सिंह, अजय कुमार राय, राजकुमार राय, उमेश प्रसाद सिंह, प्रमोद पासवान, प्रदीप कुमार, हीरानंद झा, सत्यनारायण आर्य, सुभाष सिंह, संजीव कुमार, रामबाबू सिंह, पिंकी कुमारी, अशोक कुमार राय सहित अन्य एचएम के नेतृत्व में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी आयोजित की गई। इस दौरान अभिभावकों ने भी बच्चों की पढ़ाई एवं विद्यालय से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर अपनी बातें रखीं और शिक्षकों के साथ आवश्यक सुझाव साझा किए।

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