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Doorbeen News Desk : शिवाजीनगर प्रखंड सह अंचल कार्यालय के सभागार में शनिवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत शारदीय खरीफ किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के महत्व, इसके लाभ तथा खेती में रासायनिक इनपुट के बढ़ते प्रयोग से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण के लिए टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने की अपील की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड किसान सलाहकार समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र प्रसाद बिरजू ने की। मंच संचालन सहायक तकनीकी प्रबंधक अमरदीप शर्मा ने किया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रखंड प्रमुख डॉ. गोविंद कुमार सहित उपस्थित पदाधिकारियों एवं कृषि कर्मियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी।


कृषि विज्ञान केंद्र, लादा से पहुंचे कृषि वैज्ञानिक इमिटीनुनांगसुंग ने किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया। उन्होंने कहा कि खेती में रासायनिक खाद और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ कृषि की लागत भी बढ़ती है। ऐसे में किसानों को उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए जैविक एवं प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
उन्होंने किसानों को बताया कि प्राकृतिक खेती में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर खेती की लागत को नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है। इससे मिट्टी की संरचना और उर्वरता को बनाए रखने में मदद मिलती है। उन्होंने जैविक खाद, प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग तथा फसल उत्पादन में पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाने के विभिन्न उपायों की जानकारी दी।


साथ ही किसानों की ओर से पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान के बारे में भी बताया। गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में टिकाऊ कृषि पद्धति को अपनाना किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखने, कृषि लागत कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
किसानों को खेत की मिट्टी, पानी और स्थानीय संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार कृषि पद्धति का चयन करने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान किसानों ने जैविक खेती में खाद एवं कीट प्रबंधन, प्राकृतिक खेती के तौर-तरीकों, रासायनिक इनपुट के कम प्रयोग तथा फसल की गुणवत्ता से संबंधित कई सवाल पूछे। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए व्यावहारिक जानकारी दी।


गोष्ठी का उद्देश्य किसानों को केवल जैविक एवं प्राकृतिक खेती की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उन्हें कृषि में धीरे-धीरे टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना भी रहा।
कार्यक्रम में सहायक तकनीकी प्रबंधक इंद्रजीत गौरव, सामान्य विभाग के बालमुकुंद मिश्रा, मुकेश कुमार राय, रणजीत कुमार राम, राजशेखर, वीरेंद्र प्रसाद, अजय मिश्रा, किसान सलाहकार रमाकांत रमन, विशंभर प्रसाद, संजय कुमार सहित किसान एवं कृषि कर्मी मौजूद थे। गोष्ठी के दौरान किसानों ने विशेषज्ञों द्वारा दी गई जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को लेकर अपनी रुचि दिखाई।

*मशाल कार्यक्रम के प्रशिक्षण से विद्यालयों में निखरेगी खेल प्रतिभा : एचएम – Doorbeen News*
मशाल कार्यक्रम के प्रशिक्षण से विद्यालयों में निखरेगी खेल प्रतिभा : एचएम




