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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से चल रहे जूट हस्तशिल्प कौशल विकास प्रशिक्षण का शनिवार को बिहार विधान परिषद के सदस्य सह मानवाधिकार समिति के अध्यक्ष डॉ. तरुण कुमार ने औचक निरीक्षण किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम स्वयं सहायता समूह भवन, परतापुर में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के प्रायोजन और अनमोल उपहार सेवा फाउंडेशन (औसेफा) के आयोजन में संचालित किया जा रहा है।
20 दिवसीय ‘जूट के रेशे से हस्तशिल्प : सीखने से लेकर व्यवसाय बनाने तक’ प्रशिक्षण के 13वें दिन डॉ. तरुण कुमार ने प्रशिक्षणार्थी महिलाओं से बातचीत की और उनके द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की जानकारी ली। महिलाओं ने जूट के रेशे से बनाए गए पेन स्टैंड, फूल, डलिया, तना, सिखा और वॉल हैंगिंग सहित विभिन्न हस्तशिल्प उत्पाद दिखाए।
डॉ. तरुण कुमार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि जूट से तैयार उत्पाद पर्यावरण के अनुकूल हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण से महिलाओं के लिए आय के नए अवसर पैदा होंगे और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। उन्होंने इसे पारंपरिक कला को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल बताया।
मिथिला ग्राम नाबार्ड रूरल मार्ट का भी किया निरीक्षण
एमएलसी डॉ. कुमार ने नाबार्ड के सहयोग से चीनी मिल चौक पर स्थापित मिथिला ग्राम नाबार्ड रूरल मार्ट का भी अवलोकन किया। यहां ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार किए गए मिथिला पेंटिंग सहित अन्य उत्पादों को देखकर उन्होंने उनकी सराहना की।
इस अवसर पर नाबार्ड के डीडीएम अभिनव कृष्ण ने बताया कि प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर के मेलों में भी प्रदर्शित करने की तैयारी है। अक्टूबर और नवंबर में भोपाल एवं चंडीगढ़ में आयोजित होने वाले मेलों में महिलाओं को अपने उत्पादों के साथ भाग लेने के लिए भेजा जाएगा।
कार्यक्रम के दौरान औसेफा के सचिव ललित कुमार, कलाकार प्रेरणा कुमारी, प्रशिक्षक धर्मेंद्र राम, शिवनाथ महतो सहित करीब 30 प्रशिक्षणार्थी महिलाएं मौजूद रहीं।





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