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Doorbeen News Desk: सिंघिया प्रखंड अंतर्गत रामपुर बहोर गांव निवासी 45 वर्षीय मजदूर भोलाराम की रविवार सुबह करीब नौ बजे पटना के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। पांच दिन पूर्व सांड की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। घटना के बाद परिजनों ने उन्हें बचाने के लिए कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन उनकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। रविवार को मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। वहीं गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई।

मृतक के चाचा ने बताया कि करीब पांच दिन पहले भोलाराम सांड की चपेट में आकर बुरी तरह जख्मी हो गए थे। सांड के हमले में उनके हाथ और पैर में फ्रैक्चर हो गया था। इसके अलावा शरीर के अंदरूनी हिस्सों, विशेषकर किडनी में भी गंभीर चोट आई थी। घटना के बाद परिजन तत्काल उन्हें इलाज के लिए रोसड़ा के शर्मा अस्पताल ले गए। वहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन उन्हें दरभंगा के अरबी मेमोरियल अस्पताल ले गए।

वहां भी इलाज के बाद स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें रेफर कर दिया गया।
परिजन इसके बाद भोलाराम को पटना स्थित आईजीएमएस ले गए, जहां उनका इलाज कराया गया। वहां से भी रेफर किए जाने के बाद पटना के ही एक निजी अस्पताल में उनका उपचार चल रहा था। परिजन लगातार उनके स्वस्थ होने की उम्मीद लगाए हुए थे, लेकिन रविवार की सुबह उनकी मौत हो गई। भोलाराम का शव एंबुलेंस से रविवार को गांव पहुंचा।

एंबुलेंस का सायरन सुनते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर की ओर पहुंच गए। शव के घर पहुंचते ही परिजनों के चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। परिवार के सदस्यों के विलाप से वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। ग्रामीणों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।

परिजनों ने बताया कि भोलाराम परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। वह मजदूरी कर अपनी पत्नी और तीन छोटे बच्चों का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में दो पुत्र और एक पुत्री हैं, जो अभी छोटे हैं। पिता की मौत के बाद तीनों बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। वहीं, पत्नी के सिर से भी पति का सहारा छिन गया। परिवार के सामने अब बच्चों की परवरिश और रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

मृतक के चाचा ने बताया कि भोलाराम के चले जाने से परिवार पूरी तरह बेसहारा हो गया है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि आर्थिक सहायता मिलने से छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परिवार के भरण-पोषण में कुछ सहारा मिल सकेगा। उन्होंने प्रशासन से मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द से जल्द पीड़ित परिवार को सहायता उपलब्ध कराने की अपील की। भोलाराम की मौत की खबर गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर पहुंचने लगे।

पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा रहा। जिस व्यक्ति ने मजदूरी कर अपने परिवार की जिम्मेदारी संभाल रखी थी, उसके अचानक चले जाने से परिवार के साथ-साथ ग्रामीण भी सदमे में हैं। तीन मासूम बच्चों और पत्नी की ओर देखते हुए परिजनों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

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समस्तीपुर में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर, 41 यूनिट रक्त संग्रहित





