सुरक्षित शनिवार पर सड़क-रेल सुरक्षा के प्रति बच्चों को किया जागरूक

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Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर: मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के तहत शनिवार को शिवाजीनगर प्रखंड के सभी विद्यालयों में सुरक्षित शनिवार का आयोजन किया गया। सितंबर माह के दूसरे शनिवार को आयोजित कार्यक्रम का मुख्य विषय सड़क एवं रेल दुर्घटनाओं से बचाव रहा। इस दौरान छात्र-छात्राओं को सड़क पर पैदल चलने, यातायात नियमों का पालन करने, रेलवे ट्रैक और फाटक पर सावधानी बरतने तथा दुर्घटना की स्थिति में बचाव के उपायों की विस्तार से जानकारी दी गई।

विद्यालयों में शिक्षकों के नेतृत्व में विभिन्न जागरूकता गतिविधियां आयोजित कर बच्चों को सुरक्षित व्यवहार के प्रति प्रेरित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को दैनिक जीवन में सड़क एवं रेल दुर्घटनाओं से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियों की जानकारी देना और आपातकालीन परिस्थितियों में संयम के साथ सही कदम उठाने के लिए तैयार करना था। शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।

इसलिए पैदल चलते समय सड़क के किनारे सुरक्षित स्थान का उपयोग करने, जहां उपलब्ध हो वहां फुटपाथ पर चलने तथा सड़क पार करते समय पहले दाएं-बाएं देखकर यातायात की स्थिति का आकलन करने की आदत विकसित करनी चाहिए। विद्यालयों में यातायात संकेतों और ट्रैफिक लाइट के माध्यम से बच्चों को सड़क सुरक्षा के नियम समझाए गए। इसके लिए काल्पनिक ट्रैफिक सिग्नल बनाकर लाल, पीले और हरे संकेतों के अर्थ को व्यवहारिक तरीके से बताया गया। बच्चों को समझाया गया कि लाल बत्ती का अर्थ रुकना, पीली बत्ती का अर्थ सावधानी के साथ प्रतीक्षा करना अथवा धीमा होना और हरी बत्ती का अर्थ सुरक्षित होने पर आगे बढ़ना है।

वाहन पर यात्रा करते समय हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल को अनिवार्य सुरक्षा उपाय बताते हुए इसके महत्व पर भी चर्चा की गई।सुरक्षित सड़क पार करने के लिए विद्यालयों में मॉक ड्रिल और अभ्यास कराया गया। बच्चों को बताया गया कि सड़क पार करने के लिए निर्धारित स्थान और जेब्रा क्रॉसिंग का उपयोग करना चाहिए। अचानक सड़क पर दौड़कर पार करने से बचना चाहिए। इसी तरह वाहन चालकों द्वारा यातायात संकेतों का पालन करने और तेज गति से वाहन नहीं चलाने की आवश्यकता पर भी जानकारी दी गई।

शिक्षकों ने बच्चों से कहा कि वे स्वयं यातायात नियमों का पालन करें और अपने अभिभावकों को भी इसके लिए प्रेरित करें।रेल सुरक्षा को लेकर भी बच्चों को विशेष रूप से जागरूक किया गया। रेलवे ट्रैक पर अनावश्यक रूप से जाने, ट्रैक पार करने के लिए शॉर्टकट अपनाने और रेलवे फाटक बंद रहने के दौरान उसके नीचे या आसपास से निकलने के खतरों के बारे में बताया गया। रेलवे फाटक पार करते समय दोनों ओर से आने वाली ट्रेन को देखकर ही आगे बढ़ने और बंद फाटक खुलने की प्रतीक्षा करने की सीख दी गई।

रेलवे स्टेशन पर भी प्लेटफार्म के सुरक्षित हिस्से में रहने तथा किसी भी आपात स्थिति में शिक्षक, अभिभावक अथवा संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति को सूचना देने की बात कही गई।
कार्यक्रम के दौरान दुर्घटना होने की स्थिति में क्या करें और क्या न करें, इस पर भी बच्चों के साथ चर्चा की गई। शिक्षकों ने बताया कि हादसे के बाद घबराने के बजाय शांत रहना चाहिए। घायल व्यक्ति को अनावश्यक रूप से उठाने या खींचने के बजाय तत्काल बड़ों, शिक्षकों अथवा संबंधित सहायता दल को सूचना देना जरूरी है।

प्राथमिक उपचार की सामान्य जानकारी देते हुए बच्चों को आपातकालीन स्थिति में त्वरित और सुरक्षित तरीके से सहायता लेने के लिए प्रेरित किया गया।इस दौरान पूर्व बीआरपी सह प्रधानाध्यापक बालमुकुंद सिंह, मो. अब्दुल्लाह, सत्यनारायण आर्य, अरुण पासवान, सुभाष सिंह, संतोष कुमार, नीलू कुमारी, रामनाथ पंडित, हीरानंद झा, अवधेश चौधरी, प्रवीण कुमार, पिंकी कुमारी, नंदन कुमारी, प्रमोद पासवान, प्रदीप कुमार, संजीत कुमार, सरिता कुमारी, मोहम्मद जैनुद्दीन, अमित मिश्रा,

राजकुमार राय, संजीव कुमार, अजय कुमार राय सहित विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाध्यापक, प्रधान शिक्षक के नेतृत्व में सुरक्षित शनिवार का आयोजन किया गया। शिक्षकों ने वास्तविक जीवन में होने वाली सड़क और रेल दुर्घटनाओं के उदाहरण देकर बच्चों को सावधानी बरतने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा नियम केवल विद्यालय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि घर से विद्यालय आने-जाने और दैनिक जीवन के प्रत्येक स्तर पर उनका पालन जरूरी है।

सुरक्षित शनिवार के माध्यम से बच्चों को दुर्घटना से पहले सावधानी, दुर्घटना के समय सूझबूझ और हादसे के बाद बचाव के उपायों की जानकारी दी गई। प्रखंड के सभी विद्यालयों में एक साथ आयोजित इस अभियान में छात्र-छात्राओं और शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। नियमित रूप से इस तरह के व्यवहारिक प्रशिक्षण से बच्चों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ आपात परिस्थितियों से निपटने की क्षमता भी विकसित होगी।

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