WASH सेवाओं की होगी रैंकिंग, कमियों की पहचान कर सुधारी जाएगी व्यवस्था

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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर। जिले में पेयजल, स्वच्छता और स्वच्छता व्यवहार से जुड़ी सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए मंगलवार को जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में Service Level Benchmarking के माध्यम से WASH (Water, Sanitation and Hygiene) सेवाओं की गुणवत्ता और उपलब्धता का आकलन कर व्यवस्था को मजबूत करने पर मंथन किया गया।

कार्यशाला में जिले में वर्तमान में उपलब्ध पेयजल एवं स्वच्छता सेवाओं, उनकी गुणवत्ता, संसाधनों तथा आम लोगों तक सेवाओं की पहुंच की समीक्षा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि सेवा वितरण में कहां कमी है, इसकी पहचान आंकड़ों के आधार पर की जाएगी। इसके बाद संबंधित कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जा सकेगी।

आंकड़ों के आधार पर बनेगी कार्ययोजना, विभागों के बीच समन्वय पर जोर

कार्यशाला में विशेषज्ञों एवं विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने Service Level Benchmarking की प्रक्रिया की जानकारी दी। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध WASH सेवाओं का निर्धारित मानकों के आधार पर मूल्यांकन करने तथा परिणाम के आधार पर सुधार की दिशा तय करने पर जोर दिया गया।

इस दौरान पेयजल की उपलब्धता, स्वच्छता सुविधाओं, सेवा की गुणवत्ता और आम लोगों को मिल रही सुविधाओं जैसे विभिन्न पहलुओं को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई। अधिकारियों को उपलब्ध आंकड़ों का सही तरीके से उपयोग करते हुए योजना तैयार करने और उसके प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी दी गई।

जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित पेयजल और बेहतर स्वच्छता सुविधा मिलना जरूरी है। WASH सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय, नियमित निगरानी और सेवा स्तर का वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने तथा जहां भी कमियां सामने आएं, वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका लाभ वास्तविक रूप से लोगों तक पहुंचना चाहिए।

कार्यशाला में यूनिसेफ, PRIMOVE तथा संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने प्रतिभागियों को WASH सेवा वितरण को मजबूत करने और Service Level Benchmarking की प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया।

कार्यशाला में लगातार सेवा सुधार, आंकड़ा आधारित योजना निर्माण, बेहतर अंतर्विभागीय समन्वय और प्रभावी निगरानी को लेकर आवश्यक बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। मौके पर उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह, यूनिसेफ के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि तथा जिले के विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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