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Doorbeen News Desk: पटना/समस्तीपुर। ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पतालों में ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना को स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से झटका लगा है। राज्य के 24 प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जनवरी 2026 में अल्ट्रासाउंड मशीनें भेजी गईं, लेकिन अस्पतालों का पीसी-पीएनडीटी अधिनियम के तहत निबंधन नहीं होने के कारण मशीनें अब तक चालू नहीं हो सकी हैं। कई जगह मशीनें सात माह से डिब्बों में बंद पड़ी हैं।
इन अस्पतालों में समस्तीपुर जिले के सीएचसी कल्याणपुर और खानपुर भी शामिल हैं। इसके अलावा पटना, सारण, वैशाली, नवादा, मुजफ्फरपुर, कैमूर, गोपालगंज, दरभंगा, भोजपुर, भागलपुर और अरवल के स्वास्थ्य संस्थानों में भी मशीनें भेजी गई हैं।
निबंधन के बिना अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू करना संभव नहीं
गर्भधारण पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन प्रतिषेध) अधिनियम, 1994 यानी पीसी-पीएनडीटी एक्ट के तहत अल्ट्रासाउंड केंद्र का निबंधन अनिवार्य है। निबंधन के बाद ही अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू की जा सकती है।
जानकारी के अनुसार, राज्य स्वास्थ्य समिति और बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड की ओर से अलग-अलग चरणों में स्वास्थ्य केंद्रों को अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध कराई गईं। जनवरी 2025 में कुछ केंद्रों पर मशीनें भेजी गई थीं, जबकि जनवरी 2026 में शेष 24 स्वास्थ्य संस्थानों में मशीनें पहुंचाई गईं।
मशीन पहुंची, लेकिन प्रशिक्षण और निबंधन का इंतजार
मशीन उपलब्ध कराने के साथ संबंधित चिकित्सकों, खासकर स्त्री रोग विशेषज्ञों को इसके संचालन का प्रशिक्षण दिया जाना था। लेकिन निबंधन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से कई केंद्रों पर मशीनों का उपयोग शुरू नहीं हो सका।
इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। उन्हें सरकारी अस्पताल में सुविधा नहीं मिलने के कारण निजी अल्ट्रासाउंड केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है।
एक जांच पर ₹800 से ₹1500 तक खर्च
विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान बच्चे की स्थिति और विकास की निगरानी के लिए जरूरत के अनुसार कई बार अल्ट्रासाउंड कराया जा सकता है। निजी केंद्रों में एक अल्ट्रासाउंड पर ₹800 से ₹1500 तक खर्च आता है। पूरी गर्भावस्था के दौरान जांचों पर महिला के परिवार को करीब ₹5 हजार से ₹8 हजार तक खर्च करना पड़ सकता है।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर यह सुविधा शुरू होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है।
रोजाना 30-35 गर्भवती महिलाओं को मिल सकता है लाभ
स्वास्थ्य केंद्रों में प्रतिदिन करीब 30 से 35 गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की जरूरत बताई जाती है। यदि इन केंद्रों पर मशीनें चालू हो जाएं तो बड़ी संख्या में महिलाओं को स्थानीय स्तर पर ही जांच की सुविधा मिल सकेगी।
इसके अलावा प्रत्येक केंद्र पर अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू होने से तीन से चार लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होने की संभावना है।

समस्तीपुर के दो सीएचसी भी सूची में
समस्तीपुर जिले में सीएचसी कल्याणपुर और सीएचसी खानपुर में अल्ट्रासाउंड मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं। लेकिन निबंधन सहित जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण यहां भी सेवा शुरू होने का इंतजार है। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए दूसरे सरकारी संस्थानों या निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
अब सवाल यह है कि जब मशीनें महीनों पहले स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच चुकी हैं, तो निबंधन और प्रशिक्षण की प्रक्रिया कब पूरी होगी और गर्भवती महिलाओं को सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा कब से मिलने लगेगी?

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