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Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर। एनीमिया की रोकथाम, समय पर पहचान, उपचार और नियमित फॉलो-अप को प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से 25 अगस्त से 30 नवंबर तक 75 दिवसीय विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र शिवाजीनगर के तत्वावधान में राधा कृष्ण मंडल गोविंद गोस्वामी महाविद्यालय भवन के सभागार में स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विशेष ओरिएंटेशन सह क्षमता-वर्धन सत्र आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुमित कुमार ने की, जबकि संचालन स्वास्थ्य प्रबंधक अमानुल्ला ने किया।
एएनएम, सीएचओ और जीएनएम को दी गई जिम्मेदारियों की जानकारी
स्टेट हेल्थ सोसाइटी एवं जिला स्वास्थ्य समिति समस्तीपुर के निर्देशानुसार आयोजित प्रशिक्षण में एएनएम, सीएचओ, जीएनएम एवं आरबीएसके टीम के सदस्यों को अभियान की रूपरेखा और निर्धारित गतिविधियों की जानकारी दी गई।
स्वास्थ्यकर्मियों को बताया गया कि अभियान के दौरान अपने-अपने क्षेत्र में पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उनकी स्क्रीनिंग कराई जाए और एनीमिया से प्रभावित लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया जाए।
स्क्रीनिंग से उपचार और फॉलो-अप तक पर जोर
प्रशिक्षण में एनीमिया की स्क्रीनिंग, संभावित मामलों की पहचान, उपचार एवं प्रबंधन प्रोटोकॉल, नियमित फॉलो-अप, गंभीर मामलों के रेफरल और रियल-टाइम रिपोर्टिंग की प्रक्रिया समझाई गई।
अधिकारियों ने कहा कि केवल एनीमिया की पहचान करना पर्याप्त नहीं है। प्रभावित व्यक्ति को निर्धारित उपचार दिलाना, नियमित निगरानी करना और जरूरत पड़ने पर उच्च स्वास्थ्य संस्थान में रेफर करना भी जरूरी है।
बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर विशेष फोकस
एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत बच्चों, किशोर-किशोरियों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और प्रजनन आयु वर्ग की महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
स्वास्थ्यकर्मियों को आयरन-फोलिक एसिड की अनुपूरक खुराक और आवश्यकता के अनुसार कृमिनाशक दवा के सेवन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को जागरूक करने का निर्देश दिया गया।
गंभीर मामलों में रेफरल में देरी नहीं करने का निर्देश
विशेष अभियान के दौरान गंभीर एनीमिया के मामलों की शीघ्र पहचान और उचित प्रबंधन पर विशेष बल दिया जाएगा। स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया गया कि गंभीर स्थिति वाले मरीजों को समय पर उच्च स्वास्थ्य संस्थान रेफर किया जाए।
उपचार प्राप्त कर रहे लाभार्थियों का नियमित फॉलो-अप कर यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि वे निर्धारित दवाओं और अनुपूरक का नियमित सेवन कर रहे हैं।

पौष्टिक आहार के प्रति भी किया जाएगा जागरूक
सत्र में स्वास्थ्यकर्मियों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार, पोषण और स्वस्थ व्यवहार को लेकर समुदाय में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत बताई गई। अधिकारियों ने कहा कि खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार में सकारात्मक बदलाव भी एनीमिया की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

रियल-टाइम रिपोर्टिंग पर भी विशेष जोर
अभियान की प्रगति की निगरानी के लिए रियल-टाइम रिपोर्टिंग व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया गया। स्वास्थ्यकर्मियों को सभी गतिविधियों की सही, नियमित और समयबद्ध रिपोर्टिंग करने की जानकारी दी गई।
अधिकारियों के अनुसार, सही आंकड़ों से अभियान की प्रगति का आकलन करने और आवश्यकता के अनुसार आगे की रणनीति तैयार करने में मदद मिलेगी।
समन्वय के साथ अभियान को सफल बनाने की अपील
प्रशिक्षण के दौरान बीएचएम एवं पिरामल प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। उन्होंने अभियान के उद्देश्य, निर्धारित गतिविधियों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका पर चर्चा की। प्रतिभागियों को आपसी समन्वय और सक्रिय सहभागिता के साथ निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सभी एएनएम, सीएचओ, जीएनएम एवं आरबीएसके टीम के सदस्यों से अपने-अपने कार्यक्षेत्र में समय पर पहचान, उचित उपचार, नियमित फॉलो-अप और जागरूकता गतिविधियों को प्राथमिकता देने की अपील की गई।
स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि 75 दिवसीय विशेष अभियान के माध्यम से एनीमिया की रोकथाम एवं नियंत्रण से जुड़ी सेवाओं को प्रभावी ढंग से समुदाय तक पहुंचाया जाए।
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