मिट्टी की सेहत बिगड़ी : समस्तीपुर के खेतों में नाइट्रोजन, जिंक और बोरॉन की कमी, फॉस्फोरस पहले से ज्यादा

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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर। अच्छी बारिश, महंगे बीज और समय पर रोपाई के बावजूद यदि धान की फसल उम्मीद के मुताबिक उत्पादन नहीं दे रही है, तो इसकी वजह केवल मौसम नहीं बल्कि मिट्टी की बिगड़ती सेहत भी हो सकती है। कृषि विभाग की ताजा मिट्टी जांच रिपोर्ट किसानों के लिए चेतावनी लेकर आई है। जिले के वारिसनगर, विद्यापतिनगर, दलसिंहसराय, सरायरंजन और मोहिउद्दीननगर प्रखंड के कुछ पंचायतों से लिए गए मिट्टी के नमूनों में नाइट्रोजन, जिंक और बोरॉन की कमी, जबकि फॉस्फोरस की अधिकता पाई गई है। राहत की बात यह है कि मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन पर्याप्त मात्रा में मिला है।

हालांकि विभाग का कहना है कि अभी जांच सीमित स्तर पर हुई है, इसलिए इसे पूरे जिले की स्थिति नहीं माना जा सकता। चालू वित्तीय वर्ष में 5,618 नमूनों की जांच का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 4,289 नमूने प्रयोगशाला में प्राप्त हुए हैं, जिनमें 549 नमूनों की जांच पूरी हो चुकी है।

सहायक निदेशक (रसायन) अमित कुमार के अनुसार शुरुआती रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता फॉस्फेटिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग की है। कई किसान बिना मिट्टी जांच कराए लगातार डीएपी और अन्य फॉस्फेटिक खाद का प्रयोग कर रहे हैं। इससे मिट्टी में फॉस्फोरस बढ़ रहा है, जबकि जिंक और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ रहा है। इसका सीधा असर फसल की बढ़वार और उत्पादन पर पड़ सकता है।

किसान क्या करें?

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह है कि धान की खेती में जिंक सल्फेट का संतुलित प्रयोग करें। नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए केवल यूरिया पर निर्भर रहने के बजाय गोबर की खाद, कम्पोस्ट और हरी खाद का उपयोग बढ़ाएं। फसल चक्र में चना, मूंग और मटर जैसी दलहनी फसलों को शामिल करने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है। जिन खेतों में बोरॉन की कमी हो, वहां कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही बोरॉनयुक्त उर्वरक डालें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि मिट्टी जांच रिपोर्ट के बिना डीएपी या अन्य फॉस्फेटिक खाद का अधिक प्रयोग न करें।

कमी के लक्षण पहचानें

यदि धान की पुरानी पत्तियां पीली पड़ रही हैं, नई पत्तियां छोटी रह रही हैं, पौधों की बढ़वार रुक गई है या दाना भराव कमजोर हो रहा है, तो यह पोषक तत्वों की कमी का संकेत हो सकता है। समय रहते मिट्टी की जांच और संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाकर किसान न केवल उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि खेती की लागत भी कम कर सकते हैं।

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे हर सीजन से पहले अपने खेत की मिट्टी की जांच कराएं और उसी के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करें। इससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहेगी और बेहतर उत्पादन के साथ खेती भी अधिक लाभकारी होगी।

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सामाजिक समरसता और समानता का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का लिया संकल्प

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