शत-प्रतिशत नामांकन के लिए घर-घर पहुंचा विद्यालय, ‘विद्यालय आपके द्वार’ अभियान बना मिसाल

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Samastipur News: शिवाजीनगर के शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने और 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का विद्यालय में शत प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने को लेकर शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत मधुरापुर पंचायत के प्राथमिक विद्यालय कनखरिया द्वारा एक अनोखी पहल की गई। विद्यालय परिवार की ओर से विद्यालय आपके द्वार कार्यक्रम चलाकर घर घर पहुंचकर बच्चों का ऑन द स्पॉट नामांकन किया गया।

इस अभियान का नेतृत्व प्रधान शिक्षक मोहम्मद अब्दुल्लाह ने किया, जबकि विद्यालय के बाल संसद के बच्चों ने भी इसमें उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के तहत विद्यालय की टीम गांव के विभिन्न टोले एवं मोहल्लों में पहुंची और उन अभिभावकों से संपर्क किया, जिनके बच्चे अब तक विद्यालय से बाहर थे या नामांकन नहीं हो पाया था। टीम ने अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी तथा सरकारी विद्यालयों में मिलने वाली सुविधाओं से भी अवगत कराया।

इसके बाद मौके पर ही बच्चों का नामांकन कर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया गया। प्रधान शिक्षक मोहम्मद अब्दुल्लाह ने बताया कि नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 में विद्यालय के पोषक क्षेत्र का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसे लेकर विशेष रणनीति बनाई गई थी। इसके तहत पहले बच्चों द्वारा गांव में प्रभातफेरी निकालकर लोगों को जागरूक किया गया। प्रभातफेरी के दौरान बच्चों ने “प्रत्येक बच्चा स्कूल जाए, एक भी बच्चा छूट न जाए”, “एक भी बच्चा छूटा, संकल्प हमारा टूटा” जैसे नारों के माध्यम से लोगों को प्रेरित किया।

इसके बावजूद कुछ अभिभावक अपने बच्चों का नामांकन कराने के प्रति उदासीन बने रहे। ऐसे परिवारों तक पहुंचने के लिए विद्यालय प्रशासन ने “विद्यालय आपके द्वार” कार्यक्रम शुरू किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि नामांकन के लिए अभिभावकों को विद्यालय आने की आवश्यकता नहीं पड़ी। विद्यालय की टीम स्वयं बच्चों के घर पहुंची और आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर तत्काल नामांकन सुनिश्चित किया। इससे अभिभावकों में भी काफी उत्साह देखा गया और लोगों ने विद्यालय की इस पहल की सराहना की।

अभियान के दौरान बाल संसद के बच्चों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। बच्चों ने गांव के लोगों को यह संदेश दिया कि शिक्षा ही बेहतर भविष्य की कुंजी है और प्रत्येक बच्चे का विद्यालय जाना आवश्यक है। बाल संसद के सदस्यों ने छोटे बच्चों एवं उनके अभिभावकों को प्रेरित करते हुए कहा कि विद्यालय में शिक्षा के साथ साथ खेलकूद, सांस्कृतिक गतिविधियां और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलता है। ग्रामीणों ने बताया कि इस प्रकार का कार्यक्रम पहली बार देखने को मिला, जहां विद्यालय स्वयं बच्चों के घर पहुंचकर नामांकन कर रहा है। इससे शिक्षा के प्रति लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव आया है।

कई अभिभावकों ने कहा कि विद्यालय की इस पहल से बच्चों को स्कूल भेजने के प्रति उनकी रुचि बढ़ी है। विद्यालय परिवार का कहना है कि आगे भी बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा ड्रॉपआउट रोकने के लिए जागरूकता अभियान लगातार चलाया जाएगा। विद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के अधिकार को धरातल पर उतारने और हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने के लिए इस तरह के अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे।

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