व्हाट्सएप से जुड़ने को क्लीक करें
समस्तीपुर: विमेंस कॉलेज, समस्तीपुर के प्रधानाचार्य डॉ.आदित्य चंद्र झा की अध्यक्षता में राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा 13 अप्रैल को डॉ भीमराव अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ की गई। प्रधानाचार्य ने डॉ अम्बेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, समर्पण और दृढ़ संकल्प का अनुपम उदाहरण है।
उन्होंने न केवल भारतीय संविधान का निर्माण किया, बल्कि समाज में व्याप्त असमानता, छुआछूत और भेदभाव के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही वह सशक्त माध्यम है, जिसके द्वारा समाज में समानता और न्याय स्थापित किया जा सकता है। राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ मधुलिका मिश्रा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ भीमराव अंबेडकर बीसवीं सदी के सबसे महान व्यक्तियों में से एक हैं।


वो दलितों के लिए लड़े, महिलाओं के लिए लड़े और सामाजिक-आर्थिक बदलाव के बड़े वाहक बने।ऐसे कई लोग हैं जिन्होने इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है। लेकिन बहुत कम लोग हैं जिन्होंने इतिहास बनाया है। उनमें से एक हैं युगपुरुष बाबा साहब भीमराव अंबेडकर। डॉ अंबेडकर को भारतीय संविधान के निर्माण में अहम भूमिका के नाते याद किया जाता है या फिर भेदभाव वाली जाति व्यवस्था के प्रखर आलोचक और सामाजिक गैरबराबरी के खिलाफ आवाज उठाने वाले योद्धा के तौर पर।
इन दोनों ही रूपों में डॉ अंबेडकर की बेमिसाल भूमिका को कम करके नहीं आंका जा सकता। डॉ सोनी सलोनी ने कहा कि अंबेडकर के प्रभाव से हिंदी साहित्य में उन वर्गों की आवाज़ उभरी, जिन्हें लंबे समय तक समाज और साहित्य दोनों में उपेक्षित रखा गया था।डॉ सुरेश साह (मीडिया प्रभारी) ने कहा कि डॉअंबेडकर के जीवन से प्रेरणा लें और अपने जीवन में शिक्षा,अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी को अपनाएँ डॉ साह के अनुसार बाबा साहब एक महान सामाजिक दार्शनिक एवं भारत के महान भविष्य दृष्टा थे।


डॉ नेहा जायसवाल ने कहा कि एक व्यक्ति अपने विचारों और कर्मों से पूरे राष्ट्र की दिशा बदल सकता है।आज के समय में उनके आदर्शों को अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। डॉ प्रणब ने कहा कि डॉ अंबेडकर का संदेश था कि “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”—जो आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक है। डॉ विजय गुप्ता ने कहा कि वे समावेशी अर्थव्यवस्था (Inclusive Economy) के पक्षधर थे, जहाँ दलितों और वंचित वर्गों को भी आर्थिक संसाधनों और अवसरों तक समान पहुँच मिले।
10 अप्रैल को कराए गए निबन्ध लेखन प्रतियोगिता के उत्तीर्ण प्रतिभागी को पुरस्कार वितरण किया गया जिसमें प्रथम स्थान निधि, द्वितीय स्थान कुमारी रूपा, प्रेम कुमारी एवं तृतीय स्थान उदिता, प्रज्ञा पुष्प, वसुंधरा ने प्राप्त किया। डॉ फरहत जबीन ने डॉ अम्बेडकर के विषय में बताते हुए ,आभार ज्ञापन किया। इस अवसर पर डॉ सोनी सलोनी, डॉ विजय गुप्ता, डॉ नेहा जायसवाल,डॉ सुरेश साह, प्रो फरहत जबीन, डॉ अनु कुमारी, डॉ सुमन कुमारी,डॉ शालिनी,डॉ संगीता, डॉ शबनम ,डॉ स्वाती, डॉ नीरज कुमार,
डॉ अपूर्वा, डॉ कल्पना सिंह, डॉ शहनाज, डॉ प्रणब, डॉ संगीता( गृह विज्ञान), डॉ आभा, डॉ कस्तूरिका सहित अन्य शिक्षिका उपस्थित थीं इस अवसर वैष्णवी ने मंच संचालन का कार्य किया। छात्राओं में निधि, प्रिया, सादिया, शीला, कोमल, आशिका, ज्योति, राधा, वैष्णवी, उदिता, गुड़िया, नमिता ,नौसी, शहरीन, शांभवी, प्रज्ञा, प्रेमा आदि उपस्थित रहीं।


*कुसुम पांडेय स्मृति संस्थान द्वारा किया गया सम्मानित – Doorbeen News*





