भगत सिंह के शहादत दिवस पर आइसा कार्यकताओं नें माल्यार्पण कर इनके विचारों को आत्मसात करने का लिया संकल्प

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भगत सिंह के शहादत दिवस पर आइसा कार्यकताओं नें माल्यार्पण कर इनके विचारों को आत्मसात करने का लिया संकल्प

Doorbeen News Desk: समस्तीपुर आइसा के कॉलेज इकाई अध्यक्ष अनमोल कुमार के अध्यक्षता में दर्जनों कार्यकर्ताओं ने बी.आर.बी कॉलेज समस्तीपुर में शहीद आज़ाम भगत सिंह के तशवीर पर एक जुट हो कर शहीद- ए- आजम भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव के शहादत दिवस पर शहीद- ए- आजम भगत सिंह के तस्वीर पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उनके विचारों को आत्मसात कर जन-जन तक पहुंचाने एवं शहादत सप्ताह अभियान चलाने का संकल्प लिया है।

शहादत सप्ताह का समापन कॉ. चंद्रशेखर के शहादत दिवस 31 मार्च को कैंपस में सभा आयोजित कर किया जायेगा.
माल्यार्पण के उपरांत आइसा जिलाध्यक्ष लोकेश राज नें कहां कि भगत सिंह के समाजवादी और क्रांतिकारी विचारधारा देश के लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक बराबरी के साथ – साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और देश के मेहनतकश जनता को उनका हक मिले व समाज में व्याप्त कुरीतियों को खत्म करने का था तथा युवाओं को जागरुक होकर देश के लिए लड़ने कों प्रेरित करना ताकि हमारा देश और मजबूत हों सकें,

शहीदे – ए- आजम कि देशभक्ति भारत को अंग्रेजी औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराने तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि वे चाहते थे कि भारत में समाजवाद की स्थापना हो और करोड़ों भारतीय मेहनतकश वास्तव में सत्ता सम्पन्न और आजाद बनें.

आइसा जिला उपाध्यक्ष दिपक कुमार यदुवंशी नें *इंकलाब जिंदाबाद ! साम्राज्यवाद मुर्दाबाद !* का नारा लगाते हुए कहां कि आज वैश्विक स्तर पर फासीवादी व साम्राज्यवादी ताकते अपने वर्चस्व को लेकर विश्व को युद्ध उन्माद उन्माद में धकेल दिया है। इसलिए आज जरूरत है कि शहीदों की विरासत से प्रेरणा लेकर हम युद्ध, हिंसा और साम्राज्यवाद के खिलाफ एक व्यापक जन आंदोलन खड़ा करें और दुनिया में शांति, न्याय और संप्रभुता की रक्षा के लिए आगे आएं.

आगे उन्होंने कहा कि कैंपस में भगत सिंह को पठन-पाठन में सिलेबस के तौर पर लागू किया जाए आज केंपसों से हमारे स्वतंत्रता सेनानी को नाम को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है भगत सिंह एक नाम नहीं एक विचार है.
आइसा जिला कार्यालय सचिव राजू झा, आग्रसेन आनन्द , स्नेहा सुमन भारती,श्वेता भारती,मुस्कान,गुलनाज परवीन,काजल, अभिनव कुमार, सुधांशु कुमार विवेक कुमार इत्यादि नें विचार व्यक्त किये।

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