थियोसॉफिकल सोसाइटी के 24वें दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ थीम – अध्यात्म ही शांति का मार्ग है

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थियोसॉफिकल सोसाइटी के 24वें दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य शुभारंभ थीम – अध्यात्म ही शांति का मार्ग है

Doorbeen News Desk: थियोसॉफिकल सोसाइटी के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 24वें राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ आज विधिवत दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। सम्मेलन का केंद्रीय विषय “अध्यात्म ही शांति का मार्ग है” रखा गया है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बंधु प्रदीप एच. गोहिल, विशिष्ट अतिथि बहन हीना गोहिल एवं बंधु प्रो. सी. ए. शिंदे ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए आध्यात्मिक मूल्यों की प्रासंगिकता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने उद्बोधन में मुख्य अतिथि बंधु प्रदीप एच. गोहिल ने कहा कि आध्यात्मिकता हमें आत्म निरीक्षण की प्रेरणा देती है। यह सिखाती है कि हम सब एक हैं। करुणा कमजोरी नहीं, बल्कि संवेदनशीलता की उच्चतम अभिव्यक्ति है। यदि हम आध्यात्मिकता को अपना मार्गदर्शक बना लें, तो शांति का मार्ग स्वतः प्रशस्त हो जाएगा।
अतिथियों का स्वागत करते हुए बिहार थियोसॉफिकल फेडरेशन के सचिव प्रो. राज किशोर प्रसाद ने कहा कि वर्तमान दौर में आत्मचिंतन और आत्मज्ञान के माध्यम से ही वास्तविक शांति स्थापित की जा सकती है।

इस अवसर पर अतिथियों द्वारा सम्मेलन की स्मारिका का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में बहन मितालिनी चौधरी सहित अनेक सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही।
सम्मेलन के द्वितीय सत्र में “एकत्व एवं समरसता” विषय पर महत्वपूर्ण परिचर्चा आयोजित हुई, जिसमें वक्ताओं ने वैश्विक शांति और मानवीय एकता पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सी. ए. राज किशोरी साह, चंद्रशेखर प्रसाद, ए. के. लाल, मेनू कुमारी, प्रदीप महापात्रा, डॉ. चारु, रूप नारायण श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।

उल्लेखनीय है कि इस राष्ट्रीय सम्मेलन में बिहार, असम, बंगाल एवं उड़ीसा थियोसॉफिकल फेडरेशन के 100 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिससे सम्मेलन का महत्व और व्यापकता और बढ़ गई है।

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