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सृजनशीलता शिक्षा को समर्थन और सहमति देती है : डॉ अंजली
Doorbeen News Desk: समस्तीपुर। गुरुवार को स्थानीय अध्यापक शिक्षा महाविद्यालय ( सीटीइ ) के सभागार में कविगोष्ठी आयोजित की गयी।कक्षा नौ एवं दस के प्रशिक्षु हिन्दी अध्यापकों ने अपनी मौलिक कविताओं से समा बाधी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्राचार्या डाॅ अंजली ने कहा कि सृजनात्मकता शिक्षा को समर्थन और सहमति देती है।
उन्होंने प्रशिक्षु अध्यापकों को प्रेरित किया कि वे छात्र – छात्राओं में अभिव्यक्ति की क्षमता का विकास करने के लिए विद्यालय स्तर पर भी ऐसे आयोजन करें। व्याख्याता पल्लवी कुमारी ने साहित्य और संगीत को संस्कृति के सूत्रधार के रूप में रेखांकित किया। व्याख्याता मौसमी कुमारी , ब्रजभूषण उपाध्याय,मालवर मंडल ,प्रियरंजन और साधनसेवी पंकज कुमार झा ने कहा कि साहित्य ने अभिव्यक्ति के जो रास्ते दिये हैं,उनसे सीखने और सिखाने की पद्धति का विकास हुआ है।

मंच संचालन करते हुए सुपरिचित कवि और साहित्यकार मुकेश कुमार मृदुल ने कहा कि पांच दिवसीय प्रशिक्षण में लेखन और सृजनात्मकता से जुड़े कई अध्याय हैं, इसीलिए यह कार्यक्रम प्रशिक्षण को व्यावहारिक रूप देने का उचित माध्यम है।कवि सम्मेलन की शुरुआत बबिता कुमारी के द्वारा गायी गयी सरस्वती वंदना से हुआ। संदीप सजल ने प्रेम के लिए आतुर स्वर बिखेरे :
अरे! सुनो प्रिय!कभी तुम भी आओ संगम की शीतल रेती पर।
आशुतोष कुमार सिंह ने अपनी कविता में निरंतर कोशिश करने पर बल दिया : जो होना है,होता रहत है, कोशिश कर।
वरिष्ठ कवि और कथाकार अश्विनी कुमार आलोक की ग़ज़लों ने वातावरण को रम्य बना दिया : इस बार उम्मीदों का सफर कैसा रहेगा,हर हाल में जीने का हुनर कैसा रहेगा।
साधनसेवी राजीव कुमार झा ने शिक्षकों की महिमा का गान प्रस्तुत किया,

तो कार्यक्रम के संयोजक मुकेश कुमार मृदुल ने गीत से उपस्थिति को रोमांचित कर दिया : अक्षर अक्षर गीत लिखेंगे, जग के सारे प्रीत लिखेंगे। कार्यक्रम में पंकज कुमार सहनी, मनोज राम , रवीन्द्र कुमार सुमन, ज्योत्स्ना कुमारी, दिनेश चंद्र, कविता कुमारी , प्रभाकर ,सविता कुमारी समेत दर्जन भर शिक्षकों के कविता पाठ ने सभागार में उपस्थित करीब तीन सौ श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।






