जलजमाव से मिले निजात तो गन्ना की खेती से होंगे खुशहाल

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जलजमाव से मिले निजात तो गन्ना की खेती से होंगे खुशहाल

Doorbeen News Desk: हसनपुर चीनी परिक्षेत्र के चौरों में जलजमाव से निजात मिले तो किसान गन्ना की खेती से खुशहाल होंगे। फिल्हाल किसान क्षमता से कम गन्ने की आपूर्ति कर पाते हैं। जल निस्सरण विभाग की उदासीनता से चीनी मिल को नुक़सान झेलना पड़ता है।

जबकि चीन मिल की गन्ना पेराई क्षमता 6500 टीसीडी हो गई है। गन्ना की कमी के कारण निर्धारित समय से पूर्व पेराई कार्य बंद करना पड़ता है। इस बावत चीनी मिल प्रबंधन बिन्दुवार समस्याओं को चिंहित करते हुए जल निस्सिरण विभाग समस्तीपुर के कार्यपालक अभियंता को पत्र लिखा है। जिस में चौरों के निचली भूमि से जल निस्सरण करने की व्यवस्था की मांग की गई। चीनी मिल के कार्यपालक अध्यक्ष अशोक कुमार मित्तल ने बताया कि चीनी मिल का परिक्षेत्र चार जिलों में फैला हुआ है। जो किसानों के लिए नगदी फसल का एक मात्र श्रोत है। आम लोगों के लिए जीविका का साधन है। अतिवृष्टि होने पर इलाके के चौरों में जलजमाव की जल जमाव को समस्या उत्पन्न होती है। 5 से 6 फीट तक पानी का जमाव होता है। गन्ना खेत में सड़ गल जाता है।

चीनी मिल की पेराई क्षमता 6500 टीसीडी हो गई है। चौरों से जल निकासी की व्यवस्था होने पर लगभग एक करोड़ किवंटल गन्ने की उपलब्धता होगी। चीनी मिल पेराई क्षमता के अनुरूप गन्ना की उपलब्धता नहीं हो पाती है। जिस कारण निर्धारित समय से पूर्व गन्ना पेराई कार्य बंद करना पड़ता है। 1932 में स्थापित हसनपुर चीनी मिल को अतिवृष्टि,की समस्या से जूझना पड़ता है।

निर्धारित समय से पूर्व करना पड़ता है गन्ना पेराई का समापन

अतिवृष्टि, अल्पवृष्टि के कारण हसनपुर चीनी मिल परिक्षेत्र के चौरों में हर साल जलजमाव का दृश्य कायम हो जाता है। जिसके चलते गन्ना उत्पादन प्रभावित होता है। इस संबंध में कार्यपालक अध्यक्ष अशोक कुमार मित्तल ने बताया कि निर्धारित समय से पूर्व गन्ना पेराई का समापन करना पड़ता है। सत्र-2020-21 में 52 लाख 09 हजार क्विंटल,सत्र-2021-22 में 48 लाख 69 हजार क्विंटल,2022-23 में 77 लाख 32 लाख क्विंटल,2023-24 में 75 लाख 51 हजार क्विंटल,2024-25 में 60 लाख 73 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की गई। जबकि चीनी मिल की गन्ना पैराई क्षमता 6500 टीसीडी है। लक्ष्य से कम गन्ना पेराई करने पर चीनी मिल को आर्थिक नुकसान सहना पड़ता है। चीनी मिल के 20500 एकड़ भूमि में जलजमाव होता है। घोसदाहा में 3500 एकड़,महिसर चौर में 4000 एकड़,लक्हर चौथ में 1000 एकड़ भूमि हर साल जल प्लावित होता है। किसानों की लागत पूंजी डूब जाती है।

विभागीय लापरवाही से योजना का क्रियान्वयन नहीं

हरित क्रांति लाने के उद्देश्य से हसनपुर में वर्ष 1979 में जल निस्सिरण विभाग का प्रमंडलीय कार्यालय की स्थापना हुई थी। जिसके तहत रोसड़ा खगड़िया नवगछिया तक चौरों को जोड़ कर जल निकासी की योजना बनाई गई थी। लेकिन विभाग की लापरवाही से इस योजना का कार्यान्वयन नहीं हो सका। सरकार योजनाओं के कार्यान्वयन के बदले 1998 में इस विभाग को हसनपुर से हटा कर समस्तीपुर स्थांतरित कर दिया।

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