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अमित सरन ने मंडल रेल प्रबंधक, सोनपुर के पद का विधिवत रूप से कार्यभार ग्रहण किया
दूरबीन न्यूज डेस्क। अमित सरन (IRSME) ने पूर्व मध्य रेलवे, सोनपुर मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) पद का कार्यभार विधिवत रूप से ग्रहण कर लिया। उन्होंने यह दायित्व श्री विवेक भूषण सूद से संभाला। रेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा सोनपुर मंडल के प्रशासनिक नेतृत्व हेतु श्री सरन की नियुक्ति की गई है। कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व वे बड़ोदरा हाउस, नई दिल्ली में मुख्य परियोजना प्रबंधक (हाइड्रोजन ट्रेन सेट) के पद पर कार्यरत थे, जहाँ हाइड्रोजन आधारित हरित परिवहन प्रणालियों के विकास में उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा।
भारतीय रेलवे यांत्रिक इंजीनियर्स सेवा (IRSME) के 1994 बैच से सम्बन्धित श्री सरन ने रेलवे सेवा में अपना प्रवेश वर्ष 1991 में विशेष श्रेणी रेलवे अपरेंटिस (SCRA) परीक्षा के माध्यम से किया। उन्होंने इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक उपाधि प्राप्त की है। इसके साथ ही संचालन प्रबंधन में एमबीए तथा सिराक्यूज़ विश्वविद्यालय, संयुक्त राज्य अमेरिका से लोक प्रशासन में उन्नत अध्ययन कार्यक्रम भी पूर्ण किया है।

रिसर्च, डिजाइन एवं स्टैंडर्ड ऑर्गनाइज़ेशन (RDSO) में निदेशक (परीक्षण) के रूप में श्री सरन ने देशभर में रेलवे एवं मेट्रो प्रणालियों हेतु रोलिंग स्टॉक के डिज़ाइन सत्यापन, फील्ड परीक्षण एवं उच्च गति परीक्षणों का प्रभावी नेतृत्व किया।

रेलवे बोर्ड में निदेशक पद पर रहते हुए, उन्होंने अनुसंधान, कार्यकुशलता संवर्धन एवं मानव संसाधन युक्तिकरण से संबंधित महत्त्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया।
प्रतिनियुक्ति पर, उन्होंने ऑयल इंडिया लिमिटेड में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) के रूप में कार्य करते हुए खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता एवं दायित्वबोध सुनिश्चित किया। इसके अतिरिक्त, खनन मंत्रालय में उनकी भूमिका के अंतर्गत “राष्ट्रीय लौह धातु स्क्रैप रीसाइक्लिंग फ्रेमवर्क – 2020” तथा “लौह धातु आयात निगरानी प्रणाली (NFMiMS)” जैसे दूरदर्शी नीतिगत दस्तावेजों के निर्माण में सक्रिय सहभागिता रही। वे नीति आयोग द्वारा गठित स्क्रैप मेटल पर समिति के सदस्य भी रहे।
श्री सरन का दीर्घकालिक भारतीय रेलवे सेवा अनुभव, गूढ़ तकनीकी ज्ञान एवं प्रशासनिक क्षमता उन्हें सोनपुर मंडल के लिए एक प्रभावशाली एवं दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता सिद्ध करता है। उनके नेतृत्व में मंडल की परिचालन कुशलता, संगठनात्मक समन्वय एवं नवाचारोन्मुख विकास को नई दिशा प्राप्त होगी।






