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आज खत्म हो रहा है महिला संवाद, पूरे राज्य में सबसे ज्यादा मुजफ्फरपुर में महिला संवाद में शामिल हुई दीदियाँ
दूरबीन न्यूज डेस्क। मुजफ्फरपुर। ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 18 अप्रैल से शुरू हुई महिला संवाद कार्यक्रम मुजफ्फरपुर में 18 जून को समाप्त हो रहा है, विदित हो की 2 महीने तक अनवरत रूप से सभी प्रखंडों में प्रत्येक दिन कार्यक्रम चला है। जिसमें जीविका दीदियों के साथ ही गैर जीविका दीदियों ने भी भाग लिया है। 60 दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम में 3507 जगह महिला संवाद का आयोजन किया गया।
जिसमें जिले में शुरुआत में 29 गाड़ियां से तो वहीं आखिरी दो हफ्तों में करीब 44 गाड़ियों द्वारा प्रतिदिन 88 कार्यक्रम किए गए। जिसमें औसतन ढाई सौ से 300 दीदिया महिलाएं शामिल हुई। महिला संवाद के दौरान महिलाओं को सरकार की योजनाओं के बारे में जागरूक किया गया। राज्य सरकार द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए किन-किन योजनाओं के जरिए लाभ पहुंचाया जा रहा है इसके लिए व्यापक तौर पर डिजिटल रथ के माध्यम से फिल्में भी दिखाई गई। इसके बाद सरकार की योजनाओं से मिलने वाले लाभ को दीदियों ने बताया।


सरकार की योजनाओं से जुड़ी उनकी जो जनाकांक्षाएं रही उनको भी सुना गया और लगभग मुजफ्फरपुर जिले में 97000 जन आकांक्षाओं के निवारण के लिए सभी विभाग जिला अधिकारी के नेतृत्व में प्रयासरत हैं। आकांक्षाओं के निवारण के लिए साप्ताहिक समीक्षा बैठक का आयोजन जिला अधिकारी के नेतृत्व में किया जा रहा है जिसमें आकांक्षाओं के निवारण के लिए दिशा निर्देश दिया जाता है। जीविका की डीपीएम अनीशा ने बताया कि यह अब तक का सबसे बड़ा जागरूकता कार्यक्रम है, पूरे बिहार में मुजफ्फरपुर जिले में सबसे ज्यादा महिला संवाद का आयोजन किया गया। जिसमें लगभग 8 लाख जीविका दीदियाँ सम्मलित हुई।
इस महिला संवाद की सबसे खास बात यह रही कि मुजफ्फरपुर जिले में जीविका द्वारा प्रमुख गतिविधियां जो जारी है उसकी सफलता की कहानी पूरे बिहार में दिखाई गई है. संगम संकुल स्तरीय संघ, समर्पण बीज प्रसंस्करण इकाई, दीदी की रसोई, सहित कई जीविका दीदियों की कहानी इसमें दिखाई गई है।
संचार प्रबंधक राजीव रंजन ने बताया कि बिगत दो वर्षों में मुजफ्फरपुर जिले के कई गतिविधियों को शूट किया गया,जिसे महिला संवाद के दौरान दिखाया जा रहा है । कई ऐसी जीविका दीदियों की कहानी इसमें शामिल है जो पूरे बिहार के लिए नजीर बन चुकी हैं। पूरे कार्यक्रम के सफल संचालन में सभी जीविका कर्मियों, कैडर और प्रखंड परियोजना प्रबंधकों का अहम योगदान रहा।







