धर्म-अध्यात्म: श्रीमद्भागवत कथा से लोगों के जिंदगी में आती है खुशहाली, अधर्म का संहार करते हैं भगवान

व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए यहां क्लीक करें

धर्म-अध्यात्म: श्रीमद्भागवत कथा से लोगों के जिंदगी में आती है खुशहाली, अधर्म का संहार करते हैं भगवान

दूरबीन न्यूज डेस्क। खानपुर: श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से जीवन मे खुशहाली आती है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में ही सुखमय जीवन जीने की कला छुपी है।जो श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करता है, उसके जीवन का मार्ग प्रसस्त हो जाता है। उक्त बातें विश्व ऋतायनी अनुकूल आश्रम समस्तीपुर व वृंदावन धाम चौमुआ के कथावाचक पंडित गोपाल जी महाराज भगवताचार्य ने कही।वे खानपुर के रामनगर-रंजीतपुर गांव में मां वैष्णवी चैती दुर्गा पूजा के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान कथा परोस रहे थे।

उन्होंने कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान की लीलाएं अपरम्पार है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर चर्चा कर भक्तों को बताया।माता देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण के मामा कंश पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जब कंश को जब पता चला की देवकी के आठवें पुत्र से ही कंश का संहार होगा तो कंश ने देवकी के सात संतानों को मार दिया। लेकिन आठवें पुत्र को कंश समझ नहीं सका और आकाशवाणी से उसे सावधान होने की चेतावनी मिली।

लेकिन अहंकारी कंश को ये बातें समझ मे नहीं आई।महाराज जी ने प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जब जब धरती पर अधर्म घटा है, ईश्वर ने उसका संहार किया है। भगवान के जन्म के बाद भव्य झांकी निकाली गई। इस दैरान श्रीकृष्ण की जन्मोत्सव पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने जमकर रंग गुलाल की होली खेली। महाराज जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा सभी पुराणों में श्रेष्ठ है।इसके श्रवण से जीवन धन्य हो जाता है। महाराज जी ने कथा में भगवान नरसिंह अवतार, भगवान वामन अवतार, मत्स्य अवतार, कच्छ अवतार, धनवंतरी अवतार, मोहानी अवतार, रामावतार एवं भगवान श्री कृष्ण की प्राकट्य कथा को समझाया।

उन्होंने कहा कि जब-जब धरा धाम पर धर्म की ग्लानि होती हैं, तब-तब भगवान अनेकों रूपो में प्रकट होकर अधर्म का नाश किया है। पूजा की सफलता में कमेटी के उपाध्यक्ष दिनेश ठाकुर, सचिव रामाकांत मिश्र, कोषाध्यक्ष शोभाकांत मिश्र, उपसचिव अनिल मिश्र, सदस्य महेंद्र नारायण झा, धर्मेंद्र कुमार राय, राम सगुन झा, श्याम कुमार मिश्र, सुरेंद्र मिश्र, प्रभात मिश्रा, राज कुमार राय, दीपू झा, नुनुबाबू मिश्रा, मनोज झा, अमित कुमार ठाकुर, मुकेश ठाकुर, गुड्डू मिश्रा सहित समस्त ग्रामीण सक्रिय रूप से जुटे हैं।