आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक अप्रैल से लाभुकों का चेहरा पहचान कर ही मिलेगा पोषाहार

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आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक अप्रैल से लाभुकों का चेहरा पहचान कर ही मिलेगा पोषाहार

दूरबीन न्यूज डेस्क। राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक अप्रैल से लाभुकों का चेहरा पहचान कर ही पोषाहार मिलेगा। पोषाहार के लिए लाभुक को भौतिक रूप से आंगनबाड़ी केंद्र पर आना अनिवार्य होगा। राज्य के सभी 1 लाख 15 हजार 9 आंगनबाड़ी केंद्रों में फेस रिकग्नाइज सिस्टम (एफआरएस) लागू हो जाएगी। समाज कल्याण विभाग के समेकित बाल विकास परियोजना निदेशालय (आईसीडीएस) के अनुसार इस नई व्यवस्था को लागू करने की सभी तैयारी पूरी कर ली गई है।

पोषाहार वितरण में गड़बड़ी नहीं हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए यह व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके लिए विभिन्न स्तरों पर आंगनबाड़ी सेविका को प्रशिक्षण भी दिया गया है। राज्य के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर एक करोड़ 5 लाख बच्चों, गर्भवती और अति कुपोषित लड़कियों तथा महिलाओं को पोषाहार मिलता है। आंगनबाड़ी केंद्र पर कुल लाभुक लगभग एक करोड़ 7 लाख हैं। इनमें लगभग 99 प्रतिशत लाभुक का आधार लिंक है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर छह वर्ष तक के बच्चों को पका हुआ ताजा भोजन देने का प्रावधान है। अतिरिक्त पोषाहार के तौर पर सप्ताह में दो दिन बुधवार और शुक्रवार को हर बच्चे को एक-एक अंडा दिया जाता है। हर मंगलवार और गुरुवार को दूध दिया जाता है।

केंद्र ने सभी राज्यों में लागू कराने के लिए कहा था: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण में एफआरएस लागू करने के लिए कहा था। इसके लिए नवंबर में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सचिव अनिल मलिक ने सभी राज्यों के मुख्य सचिव का पत्र भी भेजा था।