13 जिलों के 15 अनुमंडलीय अस्पतालों में मदर न्यूबोर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) होगी शुरू

व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़ने के लिए यहां क्लीक करें

13 जिलों के 15 अनुमंडलीय अस्पतालों में मदर न्यूबोर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) होगी शुरू

दूरबीन न्यूज डेस्क। राज्य में नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए 13 जिलों के 15 अनुमंडलीय अस्पतालों में मदर न्यूबोर्न केयर यूनिट (एमएनसीयू) शुरू होगी। इकाइयों की शुरुआत का उद्देश्य नवजात मृत्यु दर में कमी लाना है। मदर न्यूबॉर्न केयर यूनिट नवजात और माताओं के लिए एक विशेष देखभाल केंद्र है, जहां उच्च जोखिम वाले शिशुओं को समग्र स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। इन इकाइयों में बीमार नवजातों के साथ माता को भी रखने का प्रावधान किया गया है। सोमवार को इसकी जानकारी स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने दी। मंत्री श्री पांडेय ने बताया कि इसे जीरो सेपरेशन पद्धति कहा जाता है, जिससे माताओं और शिशुओं के बीच बेहतर जुड़ाव होता है। साथ ही, शिशु को निरंतर गर्माहट, देखभाल एवं स्तनपान का लाभ मिल पाता है। सरकार गुणवत्तापूर्ण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवा को सुदृढ़ करने के लिए मदर एंड न्यूबोर्न केयर यूनिट को व्यापक स्तर पर लागू कर रही है।

पांडेय ने कहा कि राज्य के जिन जिलों में मदर न्यूबोर्न केयर यूनिट को संचालित किया जाएगा, उनमें गया में शेरघाटी अनुमंडलीय अस्पताल, अररिया में फारबिसगंज अनुमंडलीय अस्पताल, बनमनखी अनुमंडलीय अस्पताल शामिल हैं। वहीं, सारण में सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल, बक्सर में डुमरांव अनुमंडलीय अस्पताल, गोपालगंज में हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल, भागलपुर में नवगछिया अनुमंडलीय अस्पताल, कटिहार में बरसोई अनुमंडलीय अस्पताल, पटना में बाढ़ अनुमंडलीय अस्पताल, मुंगेर में तारापुर अनुमंडलीय अस्पताल, प. चंपारण में बगहा अनुमंडलीय अस्पताल, समस्तीपुर में दलसिंहसराय एवं रोसड़ा अनुमंडलीय अस्पताल व नालंदा में राजगीर एवं हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल में भी इसे संचालित किया जाएगा।

22 मार्च तक निरीक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा करने का लक्ष्य

मंत्री ने कहा कि इन मदर न्यूबोर्न केयर यूनिट में आधारभूत संरचना, उपकरण स्थापना, एचआर व्यवस्था, आईईसी सामग्री एवं अन्य जरूरी संसाधनों को सुचारू रूप से संचालित करने की दिशा में तेजी लाई जा रही है। 2 तक सभी व्यवस्थाओं का निरीक्षण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इन इकाइयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, प्रशिक्षित स्टाफ नर्सों व स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि नवजात शिशु देखभाल सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।