समस्तीपुर। सदर अस्पताल में लावारिस मरीजों को लेकर कई बार हंगामा हुआ। मुख्यालय तक इसकी रिपोर्टिंग की गयी। लेकिन परिणाम जस का तस है। लावारिस मरीजों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सामान्य मरीजों के साथ ही रखा जाता है। जिसके कारण अन्य मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। जबकि एक लावारिस मरीज की मौत भी हो गयी, जबकि दो इलाजरत है। लावारिस मरीज के बदबू के कारण गुरुवार की सुबह वार्ड में कोई भी मरीज रहने को तैयार नहीं था।


जिसके कारण कई मरीज को परिजन लेकर निजी अस्पताल की ओर चले गए। बाद में स्वास्थ्य कर्मी दिपक कुमार एवं निरज कुमार ने अन्य मरीजों के सहयोग से लाबारिस मरीज के जख्म को ठीक किया। उसकी सफाई करने के बाद दवा आदि लगाकर मरहम पट्टी किया। जिसके बाद अन्य कर्मियों ने भी राहत की सांस ली। मिली जानकारी के अनुसार दलसिंहसराय अनुमंडलीय अस्पताल से एक अज्ञात मरीज को लाकर इमरजेंसी वार्ड में छोड़ दिया गया।


उसके सिर में जख्म था। जिसमें काफी कीड़ा लगा हुआ था। जिसके बदबू के कारण वार्ड में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। नतीजतन अन्य मरीज को लेकर परिजन निकल गए। फिलहाल दो अज्ञात मरीज सदर अस्पताल में इलाज रत है। डीएस डॉ. गिरीश कुमार ने कहा कि अज्ञात मरीज के लिए कोई अलग से व्यवस्था नहीं है। वार्ड व कर्मी की कमी है। जिसके कारण इमरजेंसी में रखा जाता है और ऑन ड्यूटी कर्मी की मदद से ही उसकी साफ-सफाई भी करायी जाती है।


सदर अस्पताल में आए दिन लावारिस मरीज को लाकर छोड़ दिया जाता है। जिसकी समुचित देखभाल एवं वार्ड की अगल से कोई व्यवस्था नहीं है। खासकर ऐसे मरीज बेसुध होते हैं। जिसके कारण बेड पर ही गंदगी करते हैं। जिसके कारण बदबू से वार्ड में रहना मुश्किल होता है। वहीं जब इसे डीएमसीएच रेफर किया जाता है तो अटेंड नहीं रहने के कारण वापस कर दिया जाता है। बता दे की समस्तीपुर सदर अस्पताल में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी कमी है। अज्ञात मरीजों में अधिकांश मरीज विक्षिप्त रहते हैं। इसके इलाज के लिए यहां कोई डॉक्टर नहीं है। वहीं इनके रखरखाव की व्यवस्था भी अब तक नहीं हो पाई है। नतीजन अधिकांश मरीज कुछ दिनों के बाद दम तोड़ देते हैं।





