समस्तीपुर। समस्तीपुर जिले के किसानों की हरी व ताजी सब्जियां सरकारी स्कूलों के बच्चों के भोजन तक नहीं पहुंच रही हैं। ये सब्जियां प्रखंड सब्जी सहकारी समितियों के माध्यम से स्कूली बच्चों के भोजन तक पहुंचनी थी। लेकिन दैनिक भुगतान नहीं होने के कारण योजना दम तोड़ रही है। सब्जियां स्कूलों तक पहुंचाने के लिए बनाई गई सरकारी योजना लगभग फ्लॉप हो चुकी है। जहां सभी स्कूलों में किसानों की सब्जियां आपूर्ति करने की योजना थी, वह कुछ ही स्कूलों तक जाकर सिमट गई हैं।


समितियों की ओर से सब्जियों को स्कूलों तक पहुंचाने के एवज में दैनिक भुगतान की मांग की जा रही है। इस कारण ना का क्रियान्वयन सही से नहीं हो रहा है। योजना पूरी तरह सफल नहीं होने के कारण जिले के सब्जी उत्पादक किसानों की सब्जियों को उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। सभी सब्जियां समय पर नहीं बिक पाने से उन्हें औने पौने दाम में बेचने को विवश होना पड़ रहा है। अधिकांश किसानों को अपनी सब्जियों को सुरक्षित रखने के लिए भंडारण की भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इन्हीं समस्याओं से निजात दिलाने के लिए उक्त योजना बनाई गई थी।


जब योजना शुरू हुई तो किसानों में यह आस जगी कि उनकी सब्जियां अब बर्बाब नहीं होगी ना औने पौने दाम में ही बिकेंगी। योजना का भी यही मकसद है कि उनकी उत्पादित सब्जियां जिले में ही सरकारी स्कूलों में नियमित रूप से खपत हो व उनके उत्पाद को उचित दाम भी मिलता रहेगा। उनकी सब्जियां स्कूलों में बच्चों के भोजन का हिस्सा बने। बच्चों को रोजाना ताजी व हरी सब्जियां भी मिलती रहे। इससे उनका स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा।

सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना को जिले में शुरू कराने के लिए सहकारिता विभाग के अधीन हर प्रखंड में कार्यरत प्रखंड स्तरीय सब्जी उत्पादन सहकारी संघ व सब्जी संघों को स्कूलों में सब्जियां आपूर्ति करने के लिए वेंडर नामित किया गया था। इससे पूर्व सहकारिता विभाग के अधिकारियों और एमडीएम के अधिकारियों के बीच कई बार बैठक की गई थी।

डीसीओ सफदर आजम ने कहा कि जिले में 3-4 समितियां ही किसानों से ली गई सब्जियां स्कूलों को आपूर्ति कर रही हैं। बाकी समितियां इस कार्य में शामिल नहीं हो रही हैं। ये समितियां स्कूलों से दैनिक रूप से सब्जियों की आपूर्ति के एवज में भुगतान की मांग कर रही हैं जिसे पूरा करने को स्कूल तैयार नहीं हैं। स्कूल मासिक रूप से भुगतान करने को तैयार है।





