पटना। राज्य के 80 हजार सरकारी स्कूलों में नियुक्त शिक्षक स्कूल अवधि में अनावश्यक मोबाइल चलाने में व्यस्त नहीं रह पायेंगे। शिक्षा विभाग ने स्कूल अवधि में शिक्षकों की वाट्सएप चैटिंग पर रोक लगा दी है। इस दौरान शिक्षक शॉर्ट वीडियो और रील्स भी नहीं बना सकेंगे। उसके लिए मनाही कर दी गयी है। शिक्षक केवल शैक्षणिक गतिविधियों के लिए और जरूरी कॉल ही लगा सकेंगे। इस पर प्रधानाध्यापकों को सख्त निगरानी के लिए कहा गया है।

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को इस आदेश को कड़ाई से लागू करने को कहा है। अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि अनिवार्य कॉल या शैक्षिक गतिविधियों के लिए ही वह मोबाइल का उपयोग कर सकेंगे। केके पाठक ने आदेश जारी कर कहा कि सभी शिक्षक स्कूल समय से आ-जा रहे हैं।

अधिकांश शिक्षक निष्ठापूर्वक शिक्षण कार्य में लगे रहते हैं, लेकिन इनमें से कुछ शिक्षक बच्चों को टास्क देकर वाट्सएप और रील्स देखने में लग जाते हैं। इसलिए विभाग ने इस पर सख्ती लगाते हुए स्कूल अवधि में इस तरह के सोशल मीडिया में व्यस्त रहने पर रोक लगायी है। विभाग द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि कई शिक्षक अभी भी ऐसे हैं, जो शैक्षणिक गतिविधियों के दौरान अपने फोन पर वाट्सएप चैटिंग और दूसरी गतिविधियों पर लिप्त रहते है।

इससे पठन-पाठन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इस तरह की रिपोर्ट आने के बाद विभाग की तरफ से यह सख्त कदम उठाया गया है। निरीक्षण के दौरान शिक्षकों की उपस्थित पर विभाग का खास फोकस रहा है, इसका फायदा भी हुआ है।

अधिकतर शिक्षक स्कूल आने भी लगे हैं। अब विभाग का फोकस है कि जो शिक्षक आयें, वह केवल शैक्षणिक गतिविधियों में ही शामिल रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक फेसबुक और ट्विटर हैंडल पर स्कूल की गैर शैक्षणिक गतिविधियों की रील्स अब बेहद कम रह गयी हैं। फिलहाल स्कूल परिसर में शिक्षक लंबे समय तक फोन पर नहीं बतिया सकेंगे।

शिक्षा विभाग और उसके निदेशालयों का कामकाज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आने जा रहा है। समूची कवायद न केवल ऑनलाइन होगी, बल्कि उस पर अफसर की निगरानी भी होगी। एक क्लिक पर संबंधित फाइल कंप्यूटर की स्क्रीन पर होगी। कुल मिलाकर बाबू गिरी से मुक्ति मिल जायेगी

कामकाज का निबटारा ऑनलाइन होगा। उम्मीद है कि अगस्त के अंतिम सप्ताह तक शिक्षा विभाग और उसके सभी निदेशालय इ ऑफिस में तब्दील हो जायेंगे। फाइलों से संबंधित सभी दस्तावेजों की स्कैनिंग अंतिम दौर में है। इसके लिए चयनित एजेंसी तीन लाख से अधिक पेजों की स्कैनिंग कर चुकी है। सौ.पीके






