समस्तीपुर। उच्च शिक्षा से जुड़े कॉलेजों में इस सत्र से एक बार फिर अटेंडेंस का फार्मूला लागू होगा। ग्रेजुएशन या पीजी की कक्षाओं में 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। इससे कम अटेंडेंस वाले छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की पात्रता नहीं दी जाएगी। कोरोना काल में कॉलेज व विवि लंबे समय तक बंद रहे, ऑनलाइन पढ़ाई हुई। इसलिए अटेंडेंस की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई थी।

इस सत्र से कक्षाएं पूरी तरह ऑफलाइन चलेंगी, इसलिए 75 फीसदी हाजिरी का फार्मूला लागू कर दिया गया है। शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों से कहा है कि 75 प्रतिशत से कम हाजिरी वाले छात्र-छात्राओं को परीक्षा में शामिल होने का मौका नहीं देना है। निर्धारित तिथि में परीक्षा पूरा करने के लिए भी कहा गया है। शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों को परीक्षा कैलेंडर दिया है और इसी के अनुसार परीक्षा आयोजित करने की हिदायत दी है।

शिक्षा विभाग ने स्नातक और स्नातकोत्तर के विभिन्न शैक्षणिक सत्रों की परीक्षा शुरू करने और रिजल्ट जारी करने की तिथि घोषित की है। एलएनएमयू दरभंगा सहित सभी विवि को आदेश जारी किया गया है। विभाग ने जारी आदेश में कहा है कि विश्वविद्यालयों एवं उनके अंगीभूत व संबद्ध कॉलेजों के सभी पदाधिकारी, कर्मी, वीक्षक तथा परीक्षा से संबंध रखने वाले सभी व्यक्ति लोक सेवक समझे जाएंगे तथा अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे।

ग्रेजुएशन व पीजी में दाखिला लेने के बाद लगातार कक्षा से गायब रहने वाले नहीं आने वाले छात्रों के पैरेंट्स को उनके गैरहाजिर रहने की सूचना दी जाएगी। कॉलेजों में उपस्थिति की पहली गणना अगस्त माह में की जाएगी। कॉलेज के जिम्मेदारों से कहा गया है कि वे दाखिला लेने वाले सभी छात्रों को शुरुआत से ही बता दें कि उनकी 75 फीसदी नियमित उपस्थिति जरूरी है।

इससे कम हाजिरी वाले छात्रों को परीक्षा देने से वंचित किया जा सकता है। एनसीसी, एनएसएस, खेलकूद, राज्य स्तरीय प्रतिस्पर्धाओं में शामिल हुए छात्रों को उपस्थित माना जाएगा। छात्रों की उपस्थिति की गणना सत्र में दो बार की जाएगी। छात्र नेता मुलायम सिंह यादव कहते है कि आज देश के लगभग हर कॉलेज में 75 पर्सेंट अटेंडेंस कंपलसरी कर दी गई है।

इसलिए कई स्टूडेंट्स तो यह भी कहते हैं कि वो कॉलेज लेक्चर लेने नहीं बल्कि अटेंडेंस पूरी करने जाते हैं और क्लास लेना उनकी मजबूरी बन गई है। लेकिन क्या स्टूडेंट्स का यह रवैया सही है? क्या कॉलेज को वो सिर्फ मस्ती का अड्डा समझ बैठे हैं। स्टूडेंट्स क्लास बंक करके अक्सर दोस्तों के साथ पार्टी या मूवी के लिए चले जाते हैं।

इसकी वजह से कई कॉलेजों में कोर्स भी पूरा नहीं हो पाता और सेमेस्टर के आखिर में स्टूडेंट्स और कॉलेज मैनेजमेंट के बीच तनातनी का माहौल नजर आता है। स्टूडेंट्स चाहते हैं कि उन्हें कम अटेंडेंस पर भी एग्जाम में बैठने दिया जाए और मैनेजमेंट अपने रूल्स एंड रेग्यूलेशंस को छोड़ना नहीं चाहता। सौ-पीके






