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समस्तीपुर। जिले में हर वर्ष मानसून अवधि के दौरान कई प्रखंडों में बाढ़ की विभीषिका का सामना करना पड़ता है जिसमें कई प्रखंड बाढ़ प्रवण श्रेणी में आते हैं। इन क्षेत्रों में बाढ़ से जानमाल की क्षति के अलावा कई तरह के जल जनित बीमारियों भी पैदा होती है जो महामारी का रूप ले सकती है। इसकी रोकथाम के लिए आवश्यक है कि पूर्व में ही प्रभावकारी कदम उठाए जाएं। जिससे बीमारियों का फैलाव नहीं हो एवं यदि हो जाए तो उसका समुचित प्रबंधन उपचार एवं नियंत्रण किया जा सके।

साथ ही इसमें कोविड-19 से बचाव के लिए सभी तरीके प्रोटोकॉल के अनुसार तथा मास्क का उपयोग सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजर, सैनिटेशन, टेस्ट एवं मरीजों का रेफरल सुविधाओं को समुचित रूप से सम्मिलित करने का निर्देश दिया गया है। नौका पर अस्थाई अस्पताल और औषधालय का व्यवस्था रहेगी। जो, बाढ़ के कारण सड़क का सम्पर्क टूट जाने और जलजमाव वाले इलाकों में भ्रमण करेगी। इस बाबत स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त, जिलाधिकारी और सिविल सर्जन को संभावित बाढ़ और उससे उत्पन्न होने वाली जलजनित बीमारियों की रोकथाम की तैयारियां पूरी कर लेने के निर्देश दिए हैं।

बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में सभी पेयजल स्रोतों की पहचान मानसून पूर्व करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के पदाधिकारी कर्मी की सहायता प्राप्त करने का निर्देश दिया गया है। पेयजल स्रोत बाढ़ के पानी जलजमाव से प्रभावित होते हैं। अतः उस क्षेत्र के पीने के पानी के शुद्धिकरण छोटे स्रोतों के लिए क्लोरीन टिकिया (हैलोजन टिकिया ) एवं बड़े स्रोतों के लिए ब्लीचिंग पाउडर के माध्यम से करने का निर्देश दिया गया है।

स्वच्छता निरीक्षक पर जल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पानी के नमूनों का संग्रह करेंगे तथा उसकी जांच सक्षम पदाधिकारी के माध्यम से प्रमंडलीय प्रयोगशाला अथवा लोक स्वास्थ्य संस्थान पटना से कराएंगे। स्वास्थ्य विभाग बाढ़ के समय होने वाली बीमारियों की रोकथाम में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता है। इससे बाढ़ आने के पहले ही तमाम तैयारियां पूरी कर लेना चाहता है।

ताकि, बाढ़ आने पर प्रभावित इलाके के लोगों को सुगमतापूर्वक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके। डीएम की अध्यक्षता में गठित महामारी रोकथाम समिति को बाढ़ और जलजमाव से उत्पन्न होने वाली बीमारियों के संभावित क्षेत्रों का पहले के अनुभव के आधार पर चिन्हित कर तत्काल उपचार और रोकथाम की कार्रवाई करने को कहा गया है।

जिले में डीएम के अधीन बाढ़ नियत्रंण अनुश्रवण कोषांग बनाने का निर्देश दिया गया है। उसी तरह से सिविल सर्जन के आधीन बाढ़ नियत्रंण अनुश्रवण कोषांग भी बनाया जाएगा।

क्षेत्रीय अपर निदेशक, सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी महामारी के समय में प्रभावित क्षेत्रों का सघन भ्रमण एवं स्वास्थ्य संबंधी किये जा रहे कार्यों का निरीक्षण और समीक्षा करेंगे।





