यहां क्लीक कर हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े
समस्तीपुर। शहर के काशीपुर में वीर कुंवर सिंह कॉलोनी स्थित संस्कारम परिसर में चल रहा श्रीमद् देवी भागवत कथा गुरुवार को संपन्न हो गयी। आचार्य योगेश प्रभाकर ने कहा कि पहले लोग घर की महिला व पुरुष काफी मेहनत करते थे। जिससे वे कम बीमार होते थे। लेंकिन जैसे जैसे आधुनिकता के दौर में भैतिक साधन व संसाधन उपलब्ध होते गये लोगों ने मेहनत करना छोड़ दिया। इससे हर घर में बीमारी ने अपना घर बना लिया है। पहले हाथ चक्की से अनाज की पिसाई होती थी। कुआं से पानी निकाला जाता था। शारिरिक कार्य होता था। लोग बीमार नही होते थे। जैसे जसे लोगों में शारीरिक क्षमता की कमी आई वैसे वैसे लोग तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित होते जा रहे हैं। आज भी जो लोग शारीरिक मेहनत करते हैं, वह स्वस्थ होते हैं।

उन्होंने लोगों से अपनी मातृभाषा से जुड़े रहने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि आजकल बच्चे पढ़ रहे हैं, लेकिन घर में भी वे अपनी मातृभाषा नहीं बोल रहे हैं। बच्चों को खूब पढ़ाईए, संस्कार दीजिए, लेकिन मातृभाषा नहीं भूलिए। यह हमारी पहचान है। धर्म व पर्व पर उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म व पूजा पाठ की विधि विज्ञान से जुड़ी हुई है। इसलिए देवता भी यहां मनुष्य रुप में जन्म लेने को आतुर होते हैं। आचार्य ने लोगों को स्वरूथ्य रहने के लिए प्रतिदिन मनुष्य योग करने की भी सलाह दी।

महाराज ने कहा कि मां दुर्गा शक्ति का स्वरुप है। लोग जिस रूप में उनकी आराधना करते हैं माता दुर्गा उसी रूप में भक्तों को संपन्न बनाते हैं। शक्ति रुपी माता दुर्गा की आराधना करने से लोग शक्तिमान, सर्वगुण संपन्न, तेजस्वी, यशस्वी, बुद्धिमान होते हैं और अपने सभी कार्यों को सफलतापूर्वक निर्वहन करते हैं।

कथा के समापन पर मुख्य यजमान राजेश झा की ओर से भव्य भंडारा का भी आयोजन किया गया। जिसमें श्रद्धालुओं को प्रसाद ग्रहण कराया गया।






