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समस्तीपुर। समस्तीपुर शहर के काशीपुर वीर कुंवर सिंह कॉलोनी में संस्कारम परिसर में आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के छठे दिन आचार्य योगेश प्रभाकर जी महाराज ने कहा कि संसार में बिना भाव के कुछ भी नहीं मिलता है। कुछ भी कार्य कर लें, उसमें अगर भाव नहीं है तो ईष्ट स्वीकार नहीं करते हैं। थोड़ा ही मिश्री का भोग लगाएं, लेकिन प्रेम, समर्पण व भाव मिलाईए, स्वीकार होगा। उन्होंने कहा कि प्रेम व समपर्ण से हम सब कार्य कर सकते हैं। प्रेम की समर्पण से देवी व हमारे इष्ट भी खुश होते हैं। लेकिन अगर इसमें भाव नहीं है तो कुछ भी स्वीकार नहीं होता है।

उन्होंने कहा कि संसार में जीवन जीने के लिए भी प्रेम, समर्पण के साथ भाव होना आवश्यक है। तभी तो विदुर के घर भगवान ने सूखी रोटी खाएं, लेकिन दुर्योधन के घर मेवा छोड़ दिए। इस दौरान उन्होंने देवी के विभिन्न महिमाओं का वर्णन एवं उनके पूजन के महत्व को भी बताया।

साथ ही उन्होंने कहा कि जीवन में सत्य को सुनना ही पर्याप्त नहीं होता अपितु सत्य को चुनना भी जरुरी है। सत्य की चर्चा करना एक बात है और सत्य का चर्या बन जाना एक बात है। आदर्शों का वाणी का आभूषण मात्र बनने से कल्याण नहीं होता, बल्कि आदर्श आचरण के रूप में घटित हों, तब कल्याण निश्चित है।

हे जगदंबा जीवन मे बहुत सारी गलती की है। मां आप को सारी गलती को माफ करना है और आगे जीवन मे कोई दुबारा गलती ना हो वैसा आपको बनाना है, क्योंकि इस जन्म में आप ही एक मात्र तारनहार हो। इस दौरान काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण करते हुए आरती में हिस्सा लिया।






