समस्तीपुर में काव्य संध्या में जुटे कवियों की कविताओं से ओतप्रोत होते रहे श्रोता

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समस्तीपुर। कुसुम पाण्डेय स्मृति साहित्य संस्थान के तत्वावधान में केन्द्रीय विद्यालय समस्तीपुर के निकट स्थित कुसुम सदन के प्रांगण में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें दूर दूर से बड़ी संख्या में रचनाकार उपस्थित हुए। डॉ रामेश गौरीश ने उपस्थित सभी रचनाकारों का हार्दिक स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिन्दी तथा मैथिली साहित्य के प्रसिद्ध रचनाकार डॉ नरेश कुमार विकल तथा संचालन प्रवीण कुमार चुन्नू ने किया। सुप्रसिद्ध गज़लकार ज्वाला सांध्य पुष्प तथा रेल राजभाषा के पूर्व अधिकारी भुवनेश्वर मिश्र मुख्य अतिथि के रूप में विराजमान रहे। कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्था के अध्यक्ष शिवेंद्र कुमार पाण्डेय ने मार्च महीने में उत्पन्न हिन्दी साहित्य के आधार स्तम्भ पर चर्चा की गयी।

प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के प्राणोत्सर्ग , होली की खुमार के साथ चैता का आनन्द पूर्ण सस्वर मधुर गायन, रोमांटिक गीत ,चुनाव चर्चा,भजन ,ग़ज़ल, हास्य व्यंग के साथ ही भोजपुरी, मैथिली की रचनाएं मुख्य रूप से आकर्षण के केंद्र रहीं। कार्यक्रम का प्रारंभ राज कुमार चौधरी द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया। कार्यक्रम के मध्य में डा परमानंद लाभ की नवीनतम कृति चैत्र की खुशबू का समवेत रुप से लोकार्पण किया गया।


मौके पर राज कुमार राय राजेश, रामाश्रय राय राकेश, राज कुमार चौधरी, प्रवीण कुमार चुन्नू, शिवेंद्र कुमार पाण्डेय, राम लखन यादव, शुभम कुमार ,भुवनेश्वर मिश्र, डॉ राम सूरत प्रियदर्शी, विष्णु कुमार केडिया, दीपक कुमार श्रीवास्तव, डॉ सुनील कुमार चम्पारणी, डॉ विजय व्रत कंठ, ज्वाला सांध्य पुष्प, अजीत कुमार सिंह, डॉ अशोक कुमार सिन्हा, डॉ नरेश कुमार विकल, डॉ परमानंद लाभ, भुवनेश्वर मिश्र, डॉ अर्चना कुमारी, अरविन्द कुमार चौधरी, आचार्य परमानंद प्रभाकर, डॉ गंगा प्रसाद आजाद सतमलपुरी, गुंजन कुमार आदि की रचनाएं खूब पसंद की गई। समापन वरदान महादेव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन से की गई।

इन कवियों की रचना खूब बटोरी ताली:
हिन्दी की दुर्दशा देख, लगता देश अब भी गुलाम है
घोर संकट छा गया है, यह राष्ट्र का अपमान है।
शिवेंद्र कुमार पाण्डेय।
नव वर्ष तुम्हारा स्वागत है, अभिनन्दन है शत वार तुम्हें
हे चैत्र शुक्ल के प्रथम दिवस, अर्पित अपनों का प्यार तुम्हें।
अजीत कुमार सिंह
अब फागुन की बात करें बेइमानी होगी, अपनों से भी छेड़छाड़ शैतानी होगी
जब पुरवाई की गंध भी बन्द पड़ी हों,धूल उड़ाना नंगे पांवों से नादानी होगी।
डॉ नरेश कुमार विकल।


दिल कितना बेचैन बना है, याद में तेरी जीने में
याद तुम्हारी करते करते,इक दर्द उठे अब सीने में।
भुवनेश्वर मिश्र।
आया मधुमास मनभावन,वन उपवन में गूंज रही
कोयल की कूक सुहावन,आया मधुमास मनभावन।
राज कुमार राय राजेश।
मन में जब विष वृक्ष उगे,तब पियूष धार बन आना
आडम्बर अम्बर ढक लें तो दिनकर बन मुस्काना।
डॉ अर्चना कुमारी।
अनुशासन से रहा सदा जिसका छत्तीस का नाता
बना हुआ है वही आज अनुशासन का व्याख्याता।
आचार्य परमानंद प्रभाकर।
आईल बानी शरण में मईया, करतानी निहोरा हो
हमनी के ले ल मईया,आके अपना कोरा हो।
डॉ राम सूरत प्रियदर्शी।
आपका देखना एक पल के लिए, है जरूरी बहुत इस ग़ज़ल के लिए
आप भी चुप उधर, और हम भी इधर,इश्क मारा गया एक पहल के लिए।
प्रवीण कुमार चुन्नू।
यह कलयुग है यारो, भावना में मत बहो
दूसरों से मतलब नहीं है अपनों का पहचान करो
दीपक कुमार श्रीवास्तव

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