व्हाट्सएप से जुड़ने को क्लीक करें
Doorbeen News Desk: समस्तीपुर के खानपुर प्रखंड अंतर्गत श्रीपुर गाहर पूर्वी पंचायत के बथनाहा गांव शिव मंदिर परिसर में आयोजित दिव्य श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन शुक्रवार को श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना रहा। वृंदावन धाम से पधारीं कथावाचिका देवी गोरप्रिया जी ने श्रीमद्भागवत कथा के महात्म्य पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को जीवन के उद्देश्य, भक्ति की महत्ता और ईश्वर की कृपा के बारे में विस्तार से बताया।
उनकी अमृतमयी वाणी से कथा स्थल भक्तिमय हो उठा। कथा का श्रवण करने के लिए बथनाहा गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। इनमें महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी विशेष रूप से देखने को मिली। कथावाचिका देवी गोरप्रिया जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल जीवों के कल्याण का ही माध्यम नहीं है, बल्कि इसकी महिमा इतनी व्यापक है कि इससे भूत-प्रेतों तक का कल्याण हो जाता है।


उन्होंने कहा कि जिस श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना स्वर्ग के देवताओं के लिए भी दुर्लभ माना गया है, उसका अवसर मनुष्य को हरि कृपा से ही प्राप्त होता है। इसलिए मनुष्य को इस दुर्लभ अवसर का लाभ उठाते हुए श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के साथ भगवान की कथा का श्रवण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अनमोल है।
इस जीवन का उद्देश्य केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं को जुटाना, धन कमाना और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाना ही नहीं है, बल्कि अपने जीवन को सद्कर्म, सेवा, परोपकार और ईश्वर की भक्ति से जोड़ना भी है। मनुष्य को अपने जीवन के वास्तविक लक्ष्य को पहचानना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा व्यक्ति को जीवन की सही दिशा दिखाती है और उसे धर्म, सत्य, प्रेम, करुणा तथा सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
कथा वाचिका देवी गोरप्रिया जी ने बताया कि भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य के मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं। सांसारिक मोह-माया और अहंकार से दूर होकर व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का बोध होता है। भगवान की लीलाओं और उनके उपदेशों का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है तथा जीवन में आध्यात्मिक चेतना का विकास होता है।


उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि कथा को केवल धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसमें बताए गए आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में भी उतारना चाहिए। परिवार, समाज और आसपास के लोगों के प्रति प्रेम, सद्भाव तथा सहयोग की भावना रखना ही सच्ची भक्ति का महत्वपूर्ण अंग है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनुष्य अनेक प्रकार की चिंताओं और परेशानियों से घिरा रहता है।
ऐसे में भगवान के नाम का स्मरण और सत्संग उसे मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक होता है। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को यह संदेश देती है कि जीवन में चाहे जैसी परिस्थिति आए, उसे धैर्य, विश्वास और सदाचार का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। ईश्वर के प्रति अटूट श्रद्धा रखते हुए अपने कर्मों को करते रहना चाहिए। कथा के दौरान श्रद्धालु भावपूर्वक प्रवचन सुनते रहे और धार्मिक वातावरण में लीन नजर आए।

बथनाहा गांव के शिव मंदिर परिसर में 22 से 28 अक्टूबर तक आयोजित श्रीमद्भागवत कथा को लेकर ग्रामीणों में उत्साह है। आयोजन को सफल बनाने में गांव के लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लाल बहादुर सिंह, जयराम सिंह, राहुल मंडल, रामबाबू सिंह, अजय कुमार, संतोष कुमार, शिक्षक संतोष कुमार, राजू कुमार उर्फ लाला, कमलदेव सिंह, राजू कुमार, दिलीप कुमार, सुरेंद्र सिंह, रमाकांत सिंह, महेश सिंह, रामानंद सिंह, रघुनाथ सिंह, मंगल सिंह, विवेकानंद कुमार, विजय सिंह, सचिन मंडल, रामभरोस मंडल और राजा बाबू कुमार सहित समस्त ग्रामवासी सहयोग कर रहे हैं।

ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रतिदिन श्रद्धालु पहुंचकर कथा का श्रवण कर रहे हैं। आयोजन स्थल पर महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य श्रद्धालुओं की उपस्थिति से भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। ग्रामीणों का उद्देश्य धार्मिक आयोजन के माध्यम से लोगों में आध्यात्मिक चेतना, आपसी सद्भाव और धर्म के प्रति आस्था को प्रोत्साहित करना है। श्रीमद्भागवत कथा के आगामी दिनों में भी श्रद्धालुओं को भगवान की महिमा और जीवन के आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े प्रसंग सुनने का अवसर मिलेगा।

*समस्तीपुर के सरकारी स्कूल में शतरंज की पाठशाला, पहली बार मोहरों पर चाल चलकर उत्साहित हुए बच्चे – Doorbeen News*
समस्तीपुर के सरकारी स्कूल में शतरंज की पाठशाला, पहली बार मोहरों पर चाल चलकर उत्साहित हुए बच्चे






One Comment