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Doorbeen News Desk: पटना। बिहार गीत ‘मेरे भारत के कंठहार’ के रचयिता प्रसिद्ध कवि-गीतकार सत्यनारायण का गुरुवार देर रात निधन हो गया। उन्होंने पटना के कदमकुआं स्थित अपने आवास पर 92 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
सत्यनारायण अपने पीछे दो पुत्र संदीप स्नेह और संजय तथा पुत्री वंदना समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी का निधन पहले ही हो चुका था। शनिवार सुबह पटना के बांस घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनके बड़े पुत्र संदीप स्नेह उन्हें मुखाग्नि देंगे।
गीत, नवगीत और कविता के साधक थे सत्यनारायण
सत्यनारायण का जन्म 13 सितंबर 1935 को भोजपुर जिले के तत्कालीन शाहाबाद क्षेत्र स्थित कौलोडिहरी गांव में हुआ था। साहित्य के क्षेत्र में उन्होंने गीत, नवगीत और कविता के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई।
वे बिहार हिंदी प्रगति समिति के अध्यक्ष और बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के उपाध्यक्ष भी रहे। साहित्य जगत में उन्हें गीत, नवगीत और कविता की त्रिवेणी के रूप में याद किया जाता है।
उनकी चर्चित रचना ‘मेरे भारत के कंठहार’ बिहार की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ी रही। उनकी रचनाओं में बिहार की मिट्टी, संस्कृति और गौरव की झलक मिलती थी।
मुख्यमंत्री ने जताया शोक
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कवि सत्यनारायण के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कवि-शिरोमणि सत्यनारायण के निधन का समाचार दुखद और हृदयविदारक है। उनकी अंत्येष्टि राजकीय सम्मान के साथ की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्यनारायण ने अपनी साहित्यिक साधना और कालजयी रचनाओं के माध्यम से बिहार की माटी, संस्कृति और गौरव को स्वर और शब्द दिए। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों एवं साहित्य प्रेमियों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की।


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