डॉ. एस. आर. रंगनाथन की 134वीं जयंती पर केंद्रीय पुस्तकालय में समारोह, योगदान को किया गया याद

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Doorbeen News Desk: दरभंगा। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय परिसर में बुधवार को पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के जनक पद्मश्री डॉ. एस. आर. रंगनाथन की 134वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान संस्थान तथा केंद्रीय पुस्तकालय के निदेशक, शिक्षक, कर्मियों और छात्र-छात्राओं ने डॉ. रंगनाथन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान संस्थान के निदेशक-सह-केंद्रीय पुस्तकालय के प्रभारी प्रो. दमन कुमार झा ने कहा कि पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. रंगनाथन का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उन्होंने पुस्तकालयों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने तथा ज्ञान को आमजन के लिए सुलभ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया।

प्रो. झा ने बताया कि डॉ. रंगनाथन मूल रूप से गणित के प्राध्यापक थे। बाद में पुस्तकालयाध्यक्ष का दायित्व मिलने के बाद उन्होंने अपना जीवन पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के विकास के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने पुस्तकालय को महज पुस्तकों के संग्रह का स्थान न मानकर समाज तक ज्ञान पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनाया।

उन्होंने कहा कि डॉ. रंगनाथन मद्रास विश्वविद्यालय के प्रथम पुस्तकालयाध्यक्ष रहे और पुस्तकालय विज्ञान में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन गए थे। भारत लौटने के बाद उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्य करते हुए पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में शोध और अनुसंधान को आगे बढ़ाया। उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1957 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।

पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान संस्थान के शिक्षक रंजीत कुमार महतो ने डॉ. रंगनाथन के प्रसिद्ध ‘पुस्तकालय विज्ञान के पांच नियम’, कोलन क्लासिफिकेशन और पुस्तकालय प्रशासन की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. रंगनाथन के विचार आज भी पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

वहीं उप-निदेशक डॉ. लक्ष्मी कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि डॉ. रंगनाथन ने पुस्तकालयों को आम लोगों के लिए अधिक सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने सभी उपस्थित लोगों को जयंती की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय पुस्तकालय परिसर को फूल-मालाओं से आकर्षक ढंग से सजाया गया था। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डॉ. रंगनाथन के आदर्शों और पुस्तकालय जगत में उनके अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए किया गया।

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