मोरदीवा पंचायत के मुखिया पर पद से हो सकते पदच्युत, डीएम ने की कार्रवाई की अनुशंसा

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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर। ग्राम पंचायत राज मोरदीवा के मुखिया की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पंचायत में सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग, योजनाओं से संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने, ग्रामसभा एवं ग्राम पंचायत की बैठक नहीं होने समेत कई आरोपों की जांच के बाद जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने मुखिया को पद से हटाने की अनुशंसा की है। इस संबंध में डीएम ने 8 अगस्त को प्रमंडलीय आयुक्त को पत्र भेजकर आगे की कार्रवाई का अनुरोध किया है।

मामला मुखिया के खिलाफ प्राप्त शिकायतों से जुड़ा है। शिकायतकर्ता विजय वात्स्यायन व अन्य तथा ललिता देवी व अन्य की शिकायत पर सदर एसडीओ से जांच कराई गई थी। एसडीओ की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम कार्यालय ने मुखिया एवं पंचायत सचिव से स्पष्टीकरण भी मांगा था। पत्र में कहा गया है कि अब तक अद्यतन स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया, जिसके कारण जांच में लगाए गए आरोप प्रमाणित पाए जाने की बात कही गई है।

सोलर लाइट में गड़बड़ी से लेकर अभिलेख नहीं देने तक के आरोप

जांच के दौरान पंचायत में ग्रामसभा समय पर नहीं होने के संबंध में पूछताछ की गई। रिपोर्ट के अनुसार मुखिया रामाधार सिह की ओर से बताया गया कि ग्रामसभा की सूचना समय पर दी जाती है, लेकिन कुछ वार्ड सदस्यों द्वारा सूचना प्राप्त करने से मौखिक रूप से इनकार किया जाता है। हालांकि, इस संबंध में लिखित साक्ष्य या अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया।

जांच में सोलर लाइट से जुड़े मामले का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार राशि का भुगतान किया गया था, जबकि संबंधित सामग्री को जांच टीम द्वारा घटिया करार दिए जाने की बात सामने आई। इस मामले में लोकायुक्त द्वारा मुखिया पर 5 लाख रुपये, जबकि पंचायत सचिव कमल किशोर एवं पंचायत सचिव राम प्रवेश सिन्हा पर 3-3 लाख रुपये दंड के रूप में जमा करने का आदेश दिए जाने का उल्लेख पत्र में है। राशि सरकारी खाते में जमा किए जाने की बात कही गई है, लेकिन संबंधित कागजात जांच के दौरान प्रस्तुत नहीं किए गए।

योजनाओं के कागजात नहीं मिलने से पूरी जांच नहीं हो सकी

जांच रिपोर्ट में पंचायत की विभिन्न योजनाओं से संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने का भी उल्लेख है। इसके कारण स्टेटमेंट, एमबी (मेजरमेंट बुक) सहित अन्य जानकारियों की उपलब्धता नहीं होने से जांच को पूरी तरह करना संभव नहीं होने की बात कही गई है।

इसके अलावा पंचायत में स्वच्छता कर्मियों, रिक्शा चालकों एवं वार्ड स्तर के सफाई कर्मियों की नियुक्ति में मनमानी तथा ग्रामसभा और ग्राम पंचायत की बैठक नहीं होने के आरोप भी सामने आए। इन मामलों से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दौरान उपलब्ध नहीं कराए जा सके।

रिपोर्ट में नए पंचायत सचिव को पुराने पंचायत सचिव से प्रभार का आदान-प्रदान नहीं किए जाने को भी गंभीर मामला माना गया है। पूर्व पंचायत सचिव के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज किया जाना उचित प्रतीत होने की बात भी जांच प्रतिवेदन में कही गई है।

डीएम के पत्र में जांच पदाधिकारी के साथ अपेक्षित सहयोग नहीं करने और पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी राशि के दुरुपयोग की बात सामने आने का उल्लेख करते हुए बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 18(5) के तहत मुखिया को पदच्युत करने की अनुशंसा की गई है।

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