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Doorbeen News Desk: मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत अगस्त माह के प्रथम शनिवार को शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत सभी सरकारी विद्यालयों में सुरक्षित शनिवार का आयोजन उत्साह, सहभागिता और जागरूकता के माहौल में किया गया। इस बार कार्यक्रम का मुख्य विषय बाढ़ के खतरे एवं डूबने से बचाव के उपाय रहा। विद्यालयों में छात्र छात्राओं को प्राकृतिक आपदाओं के दौरान स्वयं को सुरक्षित रखने, दूसरों की सहायता करने तथा प्राथमिक उपचार की जानकारी देकर आपदा प्रबंधन के प्रति व्यवहारिक रूप से तैयार किया गया। शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि थोड़ी सी सावधानी और सही समय पर लिया गया निर्णय कई अनमोल जिंदगियों को बचा सकता है।
प्रखंड के सभी विद्यालयों में एक साथ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्र छात्राओं, प्रधानाध्यापकों, प्रधान शिक्षकों एवं शिक्षकों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया। विद्यालय परिसर में बच्चों को बाढ़ के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, डूबने से बचाव, प्राथमिक उपचार तथा राहत एवं बचाव के विभिन्न उपायों की विस्तार से जानकारी दी गई। शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि वर्षा और बाढ़ के दौरान नदी, तालाब, पोखर, नहर एवं जलजमाव वाले क्षेत्रों के आसपास जाने से बचना चाहिए। किसी भी परिस्थिति में गहरे पानी में उतरने या खेलने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

नाव पर यात्रा करते समय भीड़ नहीं लगानी चाहिए तथा संतुलन बनाए रखना जरूरी है। विद्यार्थियों को समझाया गया कि यदि कोई व्यक्ति पानी में डूब रहा हो तो बिना तैयारी या तैराकी का ज्ञान होने के बावजूद सीधे पानी में कूदना खतरनाक हो सकता है। ऐसी स्थिति में रस्सी, धोती, साड़ी, बांस, लकड़ी अथवा आसपास उपलब्ध किसी सुरक्षित वस्तु की सहायता से उसे बाहर निकालने का प्रयास करना चाहिए और तत्काल स्थानीय लोगों तथा बचाव दल को सूचना देनी चाहिए। कार्यक्रम के दौरान बच्चों को सीपीआर (कृत्रिम श्वसन) एवं प्राथमिक उपचार की भी व्यवहारिक जानकारी दी गई।

शिक्षकों ने बताया कि डूबे हुए व्यक्ति को बाहर निकालने के बाद घबराने की बजाय तत्काल प्राथमिक उपचार देना चाहिए। छाती पर दबाव देने की विधि, कृत्रिम श्वसन देने की प्रक्रिया तथा जीवन रक्षक उपायों का प्रदर्शन कर विद्यार्थियों को समझाया गया। इसके साथ ही चोट लगने, पानी में बह जाने तथा सांप के काटने जैसी आपात स्थितियों में प्रारंभिक राहत देने के तरीकों की भी जानकारी दी गई।
जागरूकता अभियान के दौरान ‘क्या करें और क्या न करें’ पर विशेष चर्चा की गई। बच्चों को बताया गया कि बिना सुरक्षा उपकरण और बिना तैराकी सीखे पानी में उतरना जोखिम भरा है।

हमेशा किसी बड़े व्यक्ति की निगरानी में ही जलस्रोतों के आसपास जाएं तथा किसी भी खतरे की स्थिति में तुरंत शोर मचाकर सहायता प्राप्त करें। आपदा के समय धैर्य बनाए रखना, अफवाहों से बचना तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है।
बाढ़ से बचाव के कौशल विकास के तहत विद्यार्थियों को कई व्यवहारिक उपाय भी सिखाए गए। उन्हें बताया गया कि आवश्यकता पड़ने पर खाली प्लास्टिक की बंद बोतलों को एक साथ बांधकर, केले के थंब (तना) अथवा उल्टी हांडी एवं अन्य तैरने वाली वस्तुओं की सहायता से अस्थायी तैराकी साधन या आपातकालीन नाव तैयार की जा सकती है।

साथ ही ऊंचे एवं सुरक्षित स्थानों की पहचान, वहां तक पहुंचने के दो वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग तय करने, राहत सामग्री का सही उपयोग करने तथा सूखा भोजन, स्वच्छ पेयजल, टॉर्च और आवश्यक दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के लिए इमरजेंसी किट तैयार रखने की भी जानकारी दी गई।
इस अवसर पर विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ने बच्चों को वास्तविक घटनाओं के उदाहरण देकर बाढ़ जैसी आपदाओं के प्रति सजग रहने और दूसरों की सहायता करने की प्रेरणा दी। जागरूकता अभियान के सफल संचालन में पूर्व बीआरपी सह प्रधानाध्यापक बालमुकुंद सिंह, मो. अब्दुल्लाह, सत्यनारायण आर्य, अरुण पासवान, सुभाष सिंह, संतोष कुमार, नीलू कुमारी, रामनाथ पंडित, हीरानंद झा, अवधेश चौधरी, प्रवीण कुमार, संजीत कुमार, सरिता कुमारी, मोहम्मद जैनुद्दीन, जहाआरा, प्रवीण, उमेश प्रसाद सिंह, राजकुमार राय, अजय कुमार राय, देवानंद कामद, बिहारी दास, अरुण कुमार पासवान, हेमंत कुमार, नंदन कुमारी, मृत्युंजय कुमार सिंह, राजकुमार मुखिया, प्रमोद पासवान, प्रदीप कुमार सहित अन्य प्रधानाध्यापकों एवं प्रधान शिक्षकों की सक्रिय और सराहनीय भूमिका रही।

सभी ने अपने-अपने विद्यालयों में विद्यार्थियों को आपदा से बचाव के प्रति जागरूक करते हुए सुरक्षित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। बीईओ रामजन्म सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री विद्यालय सुरक्षा कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तक आधारित शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों को जीवन रक्षक व्यवहारिक कौशल से भी सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि बिहार बाढ़ प्रभावित राज्य है, इसलिए विद्यार्थियों को बचपन से ही आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार और सुरक्षित व्यवहार की जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। सुरक्षित शनिवार के माध्यम से बच्चों में जागरूकता, आत्मविश्वास और आपदा के समय सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित हो रही है।

उन्होंने सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि प्रत्येक छात्र न केवल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर दूसरों की सहायता करने में भी सक्षम बन सके। विद्यालयों में आयोजित यह व्यापक जागरूकता अभियान बच्चों को सुरक्षित, सजग और आपदा के प्रति तैयार बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रभावी पहल साबित हुआ।

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