बिहार के 38 रक्तवीरों ने वाराणसी में रचा इतिहास, कैंसर मरीजों के लिए किया सामूहिक SDP डोनेशन

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होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल में पहली बार बिहार के विभिन्न जिलों के रक्तदाता एक मंच पर आए, गंभीर मरीजों को मिलेगा जीवनदान

 

Doorbeen News Desk: समस्तीपुर/वाराणसी: मानवता और सेवा की मिसाल पेश करते हुए बिहार के 38 स्वैच्छिक रक्तवीरों ने वाराणसी में एक ऐतिहासिक पहल की है। बिहार के विभिन्न जिलों से आए रक्तदाता पहली बार “एसडीपी डोनर्स टीम बिहार” के बैनर तले एकजुट हुए और उत्तर प्रदेश के होमी भाभा कैंसर हॉस्पिटल में सामूहिक रूप से SDP (Single Donor Platelet) Donation कर गंभीर रूप से बीमार मरीजों के जीवन बचाने में अहम योगदान दिया।

26 जुलाई 2026 को आयोजित इस विशेष अभियान में 38 रक्तवीरों ने स्वेच्छा से प्लेटलेट्स दान किए। इन प्लेटलेट्स का उपयोग कैंसर से जूझ रहे बच्चों सहित अन्य गंभीर मरीजों के उपचार में किया जाएगा। इस पहल को बिहार ही नहीं, बल्कि देशभर में स्वैच्छिक प्लेटलेट्स दान को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अभियान में सनातन रक्तदान समूह के संस्थापक अविनाश कुमार (बादल) और समूह के सक्रिय सदस्य दीपक सिंह चौहान ने भी स्वयं एसडीपी डोनेशन कर समाज को सेवा, समर्पण और मानवता का संदेश दिया।

क्या है SDP डोनेशन?

SDP (Single Donor Platelet) Donation एक आधुनिक रक्तदान प्रक्रिया है, जिसमें विशेष एफेरेसिस (Apheresis) मशीन की सहायता से केवल प्लेटलेट्स निकाले जाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान रक्त के अन्य घटक, जैसे लाल रक्त कण और प्लाज़्मा, वापस दाता के शरीर में लौटा दिए जाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक एसडीपी डोनर से प्राप्त प्लेटलेट्स सामान्य प्लेटलेट्स की तुलना में अधिक प्रभावी होती हैं। इनका उपयोग विशेष रूप से कैंसर मरीजों, डेंगू के गंभीर रोगियों, बोन मैरो प्रत्यारोपण तथा अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के उपचार में किया जाता है।

मानवता का प्रेरक संदेश

इस सामूहिक सेवा अभियान ने यह साबित कर दिया कि जब समाज सेवा का संकल्प मजबूत हो, तो राज्य की सीमाएं भी मानवता के रास्ते में बाधा नहीं बनतीं। बिहार के रक्तवीरों की यह पहल देशभर के युवाओं और स्वैच्छिक रक्तदाताओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर सामने आई है।

इस ऐतिहासिक मानवीय अभियान में शामिल सभी 38 रक्तवीरों को उनके सराहनीय योगदान के लिए बधाई दी जा रही है। उनका यह प्रयास अनेक गंभीर मरीजों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है।

“रक्तदान महादान है और एसडीपी डोनेशन जीवन बचाने का एक अमूल्य संकल्प है।”

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