हेड टीचर की पहल से बदल गई कनखरिया स्कूल की तस्वीर, अपने नवाचार के कारण दूसरे विद्यालय के लिए बना नज़ीर

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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर के शिवाजीनगर प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में हेड टीचरों की सक्रियता और उनकी पहल ने बदलाव की एक नई इबारत लिखनी शुरू कर दी है। सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की दिशा में उठाए जा रहे कदम अब जमीनी स्तर पर परिणाम देते दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में प्रखंड के मधुरापुर पंचायत के प्राथमिक विद्यालय कनखरिया ने क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है, जहां बच्चों की उपस्थिति, अनुशासन और शिक्षा का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है।

विद्यालय प्रधान शिक्षक और शिक्षक शिक्षिकाओं के संयुक्त प्रयास से यहां के बच्चे आज किसी भी निजी विद्यालय के छात्रों से कम नहीं दिखते।प्राथमिक विद्यालय कनखरिया की यह तस्वीर प्रधान शिक्षक मो. अब्दुल्लाह की पहल का परिणाम है। उनके कार्यभार संभालते ही विद्यालय में बदलाव की शुरुआत की गई और आज उनके कार्यकाल के एक वर्ष पूरे होने पर इसका साकारात्मक असर साफ देखा जा सकता है। पूर्व के दिनों में जहां विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति कम हुआ करती थी, वहीं प्रधान शिक्षक के प्रयास से विद्यालय की नियमित उपस्थिति 97 प्रतिशत हो गई है।

कई बच्चे प्राइवेट स्कूल से नाम कटवाकर विद्यालय में नामांकन करवाए हैं। पर्यावरण के प्रति बच्चों का रूझान बढा है। पढ़ने वाले सभी छात्रों को शत-प्रतिशत ड्रेस उपलब्ध कराई गई है। इसके साथ ही बच्चों को टाई, बेल्ट और आई-कार्ड भी उपलब्ध कराया गया, जिससे विद्यार्थियों की पहचान और अनुशासन दोनों में निखार आया है। बच्चों को नए पहनावे में देखकर अभिभावकों के चेहरों पर भी संतोष और गर्व की झलक देखी गई। प्रधान शिक्षक मो. अब्दुल्लाह ने बताया कि विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने के बाद विपरित परिस्थितियों के बावजूद पहली प्राथमिकता शिक्षा के वातावरण को सुधारना और बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना था।

इसके लिए अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी में ‘आपका साथ–बदलाव की शुरुआत’ अभियान शुरू किया गया। इस अभियान के तहत स्कूल को एक आदर्श विद्यालय बनाने का संकल्प लिया गया, जिसमें नवाचार, स्वच्छता, अनुशासन, नियमितता और शैक्षणिक गुणवत्ता तथा मेनू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि बच्चे किसी भी परिवार और समाज की धुरी होते हैं, इसलिए उन्हें बेहतर माहौल देना हर शिक्षक का दायित्व है।

विद्यालय में हर शनिवार साफ-सफाई निरीक्षण दिवस’ भी मनाया जा रहा है, जिसके तहत बच्चों के नाखून, बाल, यूनिफॉर्म और संपूर्ण स्वच्छता की जांच की जाती है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा करना है, ताकि वे घर और समाज दोनों में साफ-सुथरे रहने की आदत विकसित कर सकें। इस कार्य में अभिभावक भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, जिससे विद्यालय और परिवार के बीच संवाद और सहयोग मजबूत हुआ है। नवाचार के क्रम में स्थानीय साधन स्रोत से बच्चों का शैक्षिक परिभ्रमण, पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधारोपण सहित अन्य नवाचार किए जा रहे हैं।

विद्यालय में हुए बदलाव से बच्चे भी काफी उत्साहित हैं। नई पोशाक, टाई, बेल्ट और आई-कार्ड से लैस होकर वे स्वयं को विशेष महसूस कर रहे हैं। विद्यालय की अनुशासित व्यवस्था और शिक्षकों का व्यवहार बच्चों में पढ़ाई को लेकर सकारात्मक ऊर्जा भर रहा है। कई बच्चों ने बताया कि अब उन्हें स्कूल आने में पहले से अधिक खुशी होती है और वे रोज नए उत्साह के साथ कक्षाओं में भाग लेते हैं।ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी विद्यालयों में ऐसे सकारात्मक बदलाव का दिखना पूरे प्रखंड के लिए प्रेरणादायक है। जहां एक तरफ सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं, वहीं प्राथमिक विद्यालय कनखरिया जैसे उदाहरण यह साबित कर रहे हैं कि यदि सही दिशा में ईमानदार प्रयास किए जाएं तो सरकारी विद्यालय भी उत्कृष्टता का केंद्र बन सकते हैं।

क्षेत्र के अन्य विद्यालयों में भी इसी तरह की पहल शुरू करने की चर्चा है। प्रधान शिक्षक मो. अब्दुल्लाह और उनकी टीम की इस मेहनत ने विद्यालय को नई पहचान दिलाई है। अभिभावकों का विश्वास बढ़ा है और बच्चों की शिक्षा में सुधार के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में विद्यालय और भी निखरेगा और यह मॉडल पूरे प्रखंड के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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