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Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत सभी 125 प्रारंभिक विद्यालयों में शनिवार को शिक्षा विभाग के वार्षिक कैलेंडर के तहत प्रधानाध्यापक एवं प्रधान शिक्षक के नेतृत्व में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस बार संगोष्ठी की थीम समावेशी शिक्षा, हमारा हर बच्चा महत्वपूर्ण” रखी गई। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, नियमित उपस्थिति तथा सर्वांगीण विकास के प्रति साझा जिम्मेदारी को मजबूत बनाना रहा।
पूरे प्रखंड में आयोजित इस संगोष्ठी में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भाग लिया और शिक्षकों के साथ बच्चों की शैक्षणिक प्रगति, व्यवहार, स्वास्थ्य एवं भविष्य को लेकर विस्तार से चर्चा की। संगोष्ठी के दौरान शिक्षकों ने अभिभावकों को बताया कि प्रत्येक बच्चा अपनी सीखने की क्षमता, रुचि और समझ के स्तर के अनुसार अलग होता है। इसलिए विद्यालयों में ऐसा समावेशी वातावरण तैयार किया जा रहा है, जहां सामान्य बच्चों के साथ-साथ विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को भी समान अवसर, सम्मान और सहयोग प्राप्त हो।


शिक्षा विभाग का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है जब हर बच्चे की व्यक्तिगत आवश्यकता को समझते हुए उसके अनुरूप शिक्षण व्यवस्था विकसित की जाए। इसी उद्देश्य को समाज तक पहुंचाने के लिए इस बार की संगोष्ठी को समावेशी शिक्षा की अवधारणा से जोड़ा गया। बैठक में अभिभावकों से बच्चों की नियमित विद्यालय उपस्थिति सुनिश्चित करने, समय पर विद्यालय भेजने, घर पर पढ़ाई के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराने तथा विद्यालय आने से पहले पौष्टिक नाश्ता कराने की अपील की गई।
शिक्षकों ने कहा कि स्वस्थ एवं पोषित बच्चा विद्यालय में अधिक सक्रिय रहता है और उसकी सीखने की क्षमता भी बेहतर होती है। इस दौरान बच्चों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, अनुशासन, नैतिक व्यवहार, मानसिक विकास, खेलकूद में सहभागिता तथा पढ़ाई में आने वाली कठिनाइयों पर विस्तार से चर्चा हुई। कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए विशेष शैक्षणिक कार्ययोजना तैयार करने तथा जिन बच्चों की उपस्थिति कम रहती है, उनके अभिभावकों से नियमित संपर्क बनाए रखने का निर्णय लिया गया।


संगोष्ठी में यह भी स्पष्ट किया गया कि बच्चों की शिक्षा केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं बल्कि परिवार और विद्यालय दोनों की संयुक्त जिम्मेदारी है। यदि अभिभावक घर पर बच्चों की पढ़ाई की नियमित निगरानी करें, उन्हें प्रोत्साहित करें और विद्यालय से लगातार संपर्क बनाए रखें तो सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार संभव है। शिक्षकों ने अभिभावकों से बच्चों की रुचि, प्रतिभा,
व्यवहार तथा मानसिक विकास से जुड़ी जानकारी साझा करने का आग्रह किया ताकि प्रत्येक बच्चे की क्षमता के अनुरूप उसे आवश्यक सहयोग प्रदान किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों ने भी विद्यालयों में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों की सराहना करते हुए बच्चों की शिक्षा को और प्रभावी बनाने के लिए अपने सुझाव दिए।


प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों में आयोजित इस संगोष्ठी का संचालन प्रधानाध्यापक एवं प्रधान शिक्षकों ने किया। इनमें प्रधानाध्यापक बालमुकुंद सिंह, मोहम्मद अब्दुल्लाह, बिहारी दास, देवानंद कामद, अरुण पासवान, दिलीप ठाकुर, रामनाथ पंडित, मृत्युंजय राय, नीलू कुमारी, संतोष कुमार, संजीत पोद्दार,जहाआरा प्रवीण, सरिता कुमारी, मोहम्मद जैनुद्दीन, मदन कुमार, उमेश प्रसाद राय, शांति भूषण, मृत्युंजय कुमार सिंह, अजय कुमार राय, राजकुमार राय, उमेश प्रसाद सिंह, प्रमोद पासवान, प्रदीप कुमार, हीरानंद झा, सतनारायण आर्य, सुभाष सिंह, संजीव कुमार तथा रामबाबू सिंह सहित अन्य प्रधानाध्यापक एवं प्रधान शिक्षकों ने अभिभावकों के साथ विस्तृत संवाद स्थापित कर समावेशी शिक्षा की अवधारणा को व्यवहारिक रूप देने पर बल दिया। सभी विद्यालयों में बच्चों के सर्वांगीण विकास को लेकर अभिभावकों ने भी सकारात्मक सहयोग का भरोसा दिलाया।

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