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Doorbeen News Desk: शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत मनरेगा भवन सभागार में मंगलवार को विकसित भारत जी-रामजी योजना के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता मनरेगा पीओ बबलू कुमार ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ मनरेगा पीओ बबलू कुमार, मुखिया सह मुखिया संघ अध्यक्ष रामचंद्र सिंह, नटवर राय, दुखा मुखिया विनोद पासवान, अशर्फी सहनी, अनीता देवी तथा धर्मेंद्र कुमार मंडल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य योजना के विभिन्न प्रावधानों, क्रियान्वयन की प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं तथा पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित कर्मियों को प्रशिक्षित करना था।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने विकसित भारत जी-रामजी योजना के उद्देश्यों, कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता, समयबद्ध निष्पादन, अभिलेख संधारण, निगरानी व्यवस्था तथा जनसहभागिता सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। मनरेगा पीओ बबलू कुमार ने बताया कि पंचायत स्तर पर योजनाओं का सही क्रियान्वयन तभी संभव है, जब जनप्रतिनिधि, मनरेगा कर्मी एवं संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय और जवाबदेही के साथ कार्य करें।


मनरेगा पीओ ने कहा कि विकसित भारत जी-रामजी योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र एवं संतुलित विकास को गति देना है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि विकास की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। इसके लिए पंचायत प्रतिनिधियों, मनरेगा कर्मियों एवं अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही बनाए रखना सभी संबंधित लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान जी-रामजी अधिनियम-2025 के विभिन्न प्रावधानों की विस्तृत जानकारी देते हुए योजना के तकनीकी पहलुओं, कार्यों की निगरानी, मस्टर रोल संधारण, अभिलेखों के रखरखाव तथा समय पर प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि पंचायत स्तर पर नियमित समीक्षा एवं सतत निगरानी से योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी और विकास कार्यों में तेजी होगी।


मनरेगा पीओ बबलू कुमार ने बताया कि सरकार ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर जी-रामजी योजना कर दिया है। इसके साथ ही योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव भी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत ग्रामीण मजदूरों को 100 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलती थी, जबकि अब जी-रामजी योजना के अंतर्गत 125 दिनों के रोजगार की गारंटी प्रदान की जा रही है। इससे ग्रामीण मजदूरों को अधिक रोजगार उपलब्ध होगा तथा पलायन पर प्रभावी रोक लगाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत कच्ची सड़क, पक्की सड़क, ईंट सोलिंग, पौधरोपण, पशु शेड, मनरेगा पार्क सहित विभिन्न जनोपयोगी विकास कार्य कराए जाएंगे, जिससे गांवों का आधारभूत ढांचा मजबूत होगा।

मुखिया संघ अध्यक्ष रामचंद्र सिंह ने कहा कि सरकार की विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी समन्वय के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि वे ग्रामीणों को योजना के प्रति जागरूक करें, पात्र लोगों को योजनाओं से जोड़ें तथा विकास कार्यों में आम लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करें।
कार्यशाला के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों ने योजना से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर अपनी जिज्ञासाएं भी रखीं। विशेषज्ञों एवं अधिकारियों ने सभी प्रश्नों का विस्तारपूर्वक उत्तर देते हुए योजना के क्रियान्वयन से संबंधित व्यावहारिक समस्याओं के समाधान बताए।

प्रशिक्षण के अंत में सभी प्रतिभागियों को अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में विकसित भारत जी-रामजी योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा सरकार की विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर पंचायत समिति सदस्य सरोज कुमार, बैजनाथ मुखिया शंभू बैठा, अवधेश शर्मा, समाजसेवी राजेश कुमार सिंह, राम पुकार मंडल, मनरेगा जेई पंकज कुमार सिंह, पीटीए शंभू कुमार यादव, शिव कुमार कश्यप, अकाउंटेंट सतीश कुमार, कार्यपालक सहायक नरोत्तम मिश्रा, रोजगार सेवक शंभू प्रसाद, संजीव कुमार बैठा, अभिमन्यु कुमार सिंह, अरविंद दास, हरिशंकर सहनी, जितेंद्र कुमार, रोशन कुमार, जगदीश पासवान, कपिल देव, अंबिका प्रसाद झा सहित अन्य थे।

*सेवानिवृत्ति पर शिक्षक उदय कुमार सिंह को भावभीनी विदाई, पाग, गीता, साइकिल व स्मृति-चिह्न देकर किया सम्मानित – Doorbeen News*





