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Doorbeen News Desk: पूसा (समस्तीपुर)। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा एवं इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन (INSEE) के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को विद्यापति सभागार में तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन का विषय “कृषि-खाद्य प्रणालियों में महिलाओं की भूमिका को पुनर्परिभाषित करना : सतत कृषि विकास के लिए विस्तार रणनीतियाँ” रखा गया है। इसमें देशभर के कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद, नीति-निर्माता और प्रगतिशील किसान भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् और विश्वविद्यालय गीत की प्रस्तुति से हुई। आयोजन सचिव एवं स्कूल ऑफ एग्री-बिजनेस एंड रूरल मैनेजमेंट के निदेशक डॉ. राम दत्त ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं का योगदान लंबे समय से उपेक्षित रहा है और अब उन्हें उचित पहचान देने का समय आ गया है।


सम्मेलन के दौरान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति स्वर्गीय पद्मश्री डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर उनके जीवन एवं योगदान पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय ने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के बिना सतत कृषि विकास की कल्पना अधूरी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय कृषि शिक्षा, अनुसंधान और प्रसार गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है।
मुख्य अतिथि जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो. (डॉ.) पी.के. बाजपेयी ने कहा कि ग्रामीण महिलाएं वर्षों से कृषि की रीढ़ रही हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी। अब उन्हें नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में भी समान भागीदारी मिलनी चाहिए।


भारत सरकार के योजना आयोग के पूर्व कृषि सलाहकार एवं INSEE के उपाध्यक्ष डॉ. वी.वी. सदामते ने कहा कि महिला किसानों को ऋण, आधुनिक तकनीक और बाजार तक सीधी पहुंच सुनिश्चित किए बिना कृषि का समग्र विकास संभव नहीं है। वहीं INSEE के अध्यक्ष एवं यूएएस बेंगलुरु के पूर्व कुलपति डॉ. के. नारायण गौड़ा ने महिला प्रसार कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ाने और स्वयं सहायता समूहों को तकनीकी संसाधनों से जोड़ने पर बल दिया।
पद्मश्री सम्मानित ‘किसान चाची’ राजकुमारी देवी ने कहा कि महिलाएं खेतों में बराबरी से मेहनत करती हैं, लेकिन उन्हें पहचान नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक से जुड़कर महिलाएं परिवार और समाज दोनों को नई दिशा दे सकती हैं।

इस अवसर पर सम्मेलन की स्मारिका एवं शोध सार का विमोचन किया गया। कृषि विस्तार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशेषज्ञों को INSEE अवार्ड से सम्मानित किया गया। वहीं पूसा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय को ‘मैन ऑफ एक्सीलेंस अवार्ड’ प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन की संयोजिका एवं कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस की डीन डॉ. ऊषा सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। सम्मेलन के आगामी तकनीकी सत्रों में महिला उद्यमिता, जलवायु अनुकूल खेती, डिजिटल कृषि प्रसार और महिला नेतृत्व जैसे विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार एवं शोध प्रस्तुत करेंगे।


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