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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर। समस्तीपुर पुलिस ने नेटवर्क मार्केटिंग की आड़ में कथित तौर पर चलाए जा रहे एक बड़े मानव तस्करी एवं बंधक बनाकर काम कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मुफस्सिल थाना क्षेत्र के दुधपुरा और मुसापुर इलाके में छापेमारी कर 105 युवक-युवतियों को मुक्त कराया, जिन्हें सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाया गया था और कथित रूप से नेटवर्क मार्केटिंग में काम करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से सूचना मिल रही थी कि जिले में नेटवर्क मार्केटिंग के नाम पर युवाओं को जबरन काम कराया जा रहा है। सूचना के सत्यापन के लिए साइबर थाना और नगर थाना की टीम ने जांच की, जिसमें मामला प्रथम दृष्टया सही पाया गया।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश के बाद कार्रवाई
17 जून 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से प्राप्त निर्देश के बाद पुलिस अधीक्षक समस्तीपुर के आदेश पर साइबर क्राइम डीएसपी दुर्गेश दीपक के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने दुधपुरा और मुसापुर में घेराबंदी कर छापेमारी की।


जांच में सामने आया कि लीड विजन ट्रेडिंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (गैलवे के रूप में कार्यरत) के नाम पर युवाओं को सरकारी नौकरी का प्रलोभन देकर यहां लाया जाता था। इसके बाद उन्हें कथित रूप से कैद जैसी स्थिति में रखकर नेटवर्क मार्केटिंग करने के लिए मजबूर किया जाता था।
105 लोगों को कराया गया मुक्त
पुलिस ने छापेमारी के दौरान कुल 105 लोगों को मुक्त कराया, जिनमें—
- 67 युवक
- 38 युवतियां (पुलिस विज्ञप्ति में कुल संख्या 105 बताई गई है)
मुक्त कराए गए लोगों में बड़ी संख्या में नाबालिग भी शामिल हैं।
- 29 नाबालिग लड़के
- 10 नाबालिग लड़कियां
पीड़ितों में बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा असम और पश्चिम बंगाल के युवक-युवतियां भी शामिल बताए गए हैं।


पांच आरोपी गिरफ्तार
मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है—
- शाखा कुमारी (दरभंगा)
- अंजुलियस ओरंग (असम)
- प्रमोद कुमार (गया)
- सुस्मिता कुमारी (असम)
- पोलो उरांव (असम)
कई गंभीर धाराओं में दर्ज हुई प्राथमिकी
इस मामले में मुफस्सिल थाना कांड संख्या 259/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS), जेजे एक्ट तथा चाइल्ड एंड एडोलसेंट लेबर एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
कई एजेंसियों ने मिलकर चलाया अभियान
छापेमारी अभियान में साइबर क्राइम डीएसपी, मुफस्सिल थाना, महिला थाना, मथुरापुर थाना, एससी/एसटी थाना, साइबर थाना के पुलिस पदाधिकारी तथा करीब 80 पुलिसकर्मी शामिल थे। इसके अलावा मिशन मुक्ति फाउंडेशन और रेस्क्यू रिलीफ फाउंडेशन के सदस्य भी अभियान में सहयोग कर रहे थे।
पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस कथित गिरोह का दायरा कितने राज्यों तक फैला हुआ है तथा कितने अन्य लोग इसमें शामिल हैं।


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