11 से 13 जून के बीच गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना, किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

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Doorbeen News Desk: समस्तीपुर: ग्रामीण कृषि मौसम सेवा, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (DRPCAU), पूसा एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी 10 से 14 जून 2026 के मौसम पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर बिहार के कई जिलों में आगामी दिनों में मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। विशेष रूप से 11 से 13 जून के बीच मेघगर्जन, तेज हवाओं और वर्षा की संभावना जताई गई है।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्वानुमान अवधि के अधिकांश समय आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। गोपालगंज, मधुबनी, शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिलों में 11 और 12 जून को 65 से 70 मिमी तक भारी वर्षा होने की आशंका है, जबकि अन्य जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है।

पिछले तीन दिनों के दौरान अधिकतम औसत तापमान 35.5 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस अवधि में कुल 19.6 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई।

मौसम का पूर्वानुमान

  • अधिकतम तापमान : 35 से 39 डिग्री सेल्सियस
  • न्यूनतम तापमान : 25 से 28 डिग्री सेल्सियस
  • सुबह की आर्द्रता : 70 से 75 प्रतिशत
  • दोपहर की आर्द्रता : 20 से 25 प्रतिशत
  • हवा की गति : 15 से 19 किमी प्रति घंटा
  • हवा की दिशा : मुख्यतः पूर्वी

किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह

खरीफ मक्का की बुआई शुरू करें

वर्तमान मौसम खरीफ मक्का की बुआई के लिए अनुकूल है। अंतिम जुताई के समय गोबर की सड़ी खाद के साथ संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। शक्तिमान-2, शक्तिमान-5, शक्तिमान-4 तथा राजेंद्र शंकर मक्का-3 किस्मों की बुआई उपयुक्त मानी गई है।

धान की नर्सरी लगाने का उचित समय

मध्यम अवधि की धान किस्में जैसे संतोर सीता, सरोज, सहभागी धान, राजेंद्र श्वेता तथा सुगंधित किस्में राजेंद्र सुवासिनी, राजेंद्र कस्तूरी और राजेंद्र भगवती की नर्सरी लगाने का समय आ गया है। इसकी बुआई 25 जून तक की जा सकती है।

हरी खाद के लिए ढैंचा की खेती

मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए किसानों को ढैंचा (हरी खाद) की बुआई करने की सलाह दी गई है। इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ और नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है तथा धान की बेहतर उपज प्राप्त होती है।

तिल की बुआई का उपयुक्त समय

खरीफ तिल की बुआई मध्य जून से मध्य जुलाई तक की जा सकती है। जल निकास वाली ऊंची भूमि का चयन करें और बीजों को बुआई से पूर्व थीरम से उपचारित करें। कृष्णा, कालिका और कांके सफेद प्रमुख अनुशंसित किस्में हैं।

सब्जी उत्पादकों के लिए सुझाव

भिंडी, खीरा, नेनुआ, लौकी, कद्दू जैसी ग्रीष्मकालीन सब्जियों की निराई-गुड़ाई एवं फसल सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें। बरसाती सब्जियों की बुआई शुरू करें तथा प्याज की नर्सरी ऊंची क्यारियों पर तैयार करें ताकि वर्षा के दौरान जलभराव से बचाव हो सके।

वैज्ञानिकों की अपील

वरीय वैज्ञानिक एवं नोडल पदाधिकारी डॉ. ए. सत्तार ने किसानों से मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए कृषि कार्यों की योजना बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि संभावित वर्षा और तेज हवाओं को देखते हुए खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें तथा मौसम संबंधी ताजा जानकारी पर लगातार नजर बनाए रखें।

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