खाद की कालाबाजारी रोकने को कृषि विभाग सख्त, 20 प्रखंडों में छापेमारी दल करेगा निगरानी

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समस्तीपुर : जिले में किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए कृषि विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। जिले के सभी खाद दुकानों पर नजर रखने के लिए विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया है। जिले के सभी 20 प्रखंडों में लगातार निरीक्षण करेगा और खाद बिक्री की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार करेगा। विभाग का उद्देश्य है कि किसानों को उनकी जरूरत के अनुसार निर्धारित दर पर खाद मिले और किसी भी स्तर पर कृत्रिम कमी पैदा कर कालाबाजारी न हो।

बतादें कि रबी फसल के दौरान जिले में कृषि विभाग के द्वारा कड़ी कार्रवाई की गई थी। इसके तहत खाद कालाबाजारी एवं अनियमितता बरतने के आरोप में पांच दुकानों का लाइसेंस रद्द किया गया था। जबकि हसनपुर में एक दुकानदार के विरुद्ध प्राथमिक की दर्ज की गई थी। वही सात दुकानदारों के लाइसेंस को निलंबित किया गया था।

जिला कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्तमान समय में जिले में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है। विभिन्न गोदामों और अधिकृत दुकानों पर उर्वरक का भंडारण कराया गया है, ताकि खेती के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों को परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके बावजूद विभाग को आशंका है कि कुछ दुकानदार अधिक लाभ कमाने के उद्देश्य से निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद बेच सकते हैं या स्टॉक छिपाकर कृत्रिम संकट पैदा कर सकते हैं। इसी को देखते हुए निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है।

जिला कृषि अधिकारी सुमित सौरभ ने बताया छापेमारी दल में कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ प्रखंड स्तर के कर्मियों को भी शामिल किया गया है। यह दल दुकानों पर स्टॉक रजिस्टर, बिक्री रजिस्टर और मूल्य सूची की जांच करेगा। साथ ही किसानों से सीधे फीडबैक लेकर यह सुनिश्चित करेगा कि उन्हें निर्धारित मूल्य पर खाद मिल रही है या नहीं। यदि किसी दुकान पर अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित दुकानदार के खिलाफ लाइसेंस निलंबन, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कृषि विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि खाद खरीदते समय रसीद अवश्य लें और किसी प्रकार की गड़बड़ी मिलने पर तुरंत विभाग को सूचना दें। अधिकारियों का कहना है कि खरीफ मौसम को देखते हुए खाद की मांग बढ़ने की संभावना है, इसलिए अभी से व्यवस्था को दुरुस्त रखा जा रहा है। विभाग का दावा है कि जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति भी सुनिश्चित की जाएगी।

:स्टॉक में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है खाद:-जिला कृषि पदाधिकारी ने बताया कि पर्याप्त मात्रा में जिले में खाद उपलब्ध है। यूड़िया 6193 एमटी उपलब्ध है। जबकि डीएपी 5560 एमटी  जिला में उपलब्ध है। वही एमओपी 1398 एमटी, एनपीकेएस 7129 एमटी और एसएसपी 2759 एमटी खाद उपलब्ध है।

 

:जिले के उर्वरक विक्रेताओं की मनमानी पर रोक:- टैगिंग के चलन पर भी रोकः उर्वरक कंपनियों द्वारा खुदरा विक्रेताओं पर अनुदानित उर्वरकों के साथ अन्य उत्पादों की जबरन टैगिंग कर बिक्री करने का दबाव बनाये जाने को राज्य सरकार ने गंभीर अनियमितता माना है। यह भी नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। राज्य सरकार द्वारा लागू जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कृषि विभाग ने इस प्रकार की टैगिंग प्रथा पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया है।

इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी जैसे अनुदानित उर्वरकों के साथ किसी भी प्रकार के अन्य उत्पाद की जबरन टैगिंग पूरी तरह अनुचित है और यह नियमों के विरुद्ध है। इस तरह की गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

:शिकायत मिलने पर होगी जांच:- बता दे कि राज्य सरकार द्वारा उर्वरक की आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था पर नियंत्रण के लिए फ्लाइंग स्कॉयड टीम का गठन किया गया है। ये टीम प्राप्त शिकायतों के आधार पर निरंतर छापेमारी करेगी। साथ हीं यह भी निर्देश दिया गया कि जिले में उर्वरक की कालाबाजारी एवं अधिक मूल्य पर बिक्री को रोकने के लिए कृषि विभाग के पदाधिकारियों जांच दल गठित कर नियमित रूप से उर्वरक का प्रतिष्ठानों का निरीक्षण एवं छापामारी की जाय। कालाबाजारी जमाखोरी और खाद के लिए मारामारी की स्थिति आती है।

और अधिक दाम पर बिक्री को ले कर पिछले साल भी कई उर्वरक प्रतिष्ठानों का उर्वरक प्राधिकार पत्र रद्द कर दिया गया था। इस बार सीजन से पहले ही कृषि विभाग द्वारा सख्त निगरानी की जा रही है। जिला कृषि पदाधिकारी सुमित सौरभ ने बताया कि जो प्रतिष्ठान खाद की कालाबाजारी या जमाखोरी में लिप्त पाएं जाएंगे, उन पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। राज्य सरकार के इस अभियान का मकसद सभी मौसम में किसानों को सही भाव पर खाद उपलब्ध कराना है।

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