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पशुओं में मुंहपका बीमारी को लेकर दिया जा रहा एफएमडी वैक्सीन, सभी ब्लॉक को उपलब्ध कराया गया एफएमडी का वैक्सीन
Doorbeen News Desk: पशुओं की खुरपका-मुंहपका बीमारी यानि एफएमडी बेहद ही खतरनाक बीमारी है। इस बीमारी के चलते पशुओं को बहुत तकलीफ होती है और उनका उत्पादन प्रभावित होता है। एफएमडी बीमारी गाय, भैंस, भेड़ और बकरी को हो जाती है। जिससे पशुपालकों को नुकसान होता है। समस्तीपुर में भी पशुओं को इस रोग से बचने के लिए टीकाकरण किया जा रहा है। इसलिए सभी पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है।
एक ओर सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने का काम कर रही है तो दूसरी ओर इस तरह की बीमारियों से नुकसान हो रहा है। ऐसे में सरकार की तरफ से फ्री वैक्सीनेशन अभियान चलाया जा रहा है। बिहार में डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ये काम कर रहा है। जिला पशुपालन पदाधिकारी अमन श्रीवास्तव ने बताया कि यह अभियान जिले भर में 20 ब्लॉक में चलाया जाएगा। इसके लिए सभी ब्लॉक में वैक्सीन उपलब्ध करा दिया गया है।

-:पशुओं में एफएमडी होती है वायरल बीमारी:-एफएमडी (खुरपका-मुँहपका) का टीका पशुओं को इस घातक वायरल बीमारी से बचाने के लिए हर 6 महीने में एक बार दिया जाता है, यानी साल में दो बार टीका लगाया जाता है।
:टीकाकरण के मुख्य बिंदु: हर 6 महीने में एक बार, आमतौर पर फरवरी-मार्च और अगस्त-सितंबर के आसपास। इस लिए गाय, भैंस, भेड़, बकरी को टिका दिया जाता है। यह टिका 4 महीने से अधिक उम्र के बछड़ों, बछिया को पहली खुराक दी जाती है। पहली खुराक के 1 महीने बाद दूसरी खुराक दी जाती है। अगर पहले नहीं लगा हो, जिसे बूस्टर कहा जाता है।

-:पशु में खुरपका मुंहपका रोग के लक्षण क्या होते हैं:- इस रोग के आने पर पशु को तेज बुखार हो जाता है। बीमार पशु के मुंह, मसूड़े, जीभ के ऊपर नीचे ओंठ के अन्दर का भाग खुरों के बीच की जगह पर छोटे-छोटे दाने से उभर आते हैं, फिर धीरे-धीरे ये दाने आपस में मिलकर बड़ा छाला बनाते हैं। समय पाकर यह छाले फल जाते हैं और उनमें जख्म हो जाता है।







